हाय! हाय!
सूरज की छाती पर
दिनदहाड़े ये कैसी फड़-फड़ ?
जो चमगादड़ों में मची है चूँ-चपड़
घुग्घूओ में भी हो रही धर-पकड़...
झींगुरों का मनमाना शोर
मेंढकों में भी मीठा रोर...
सियारों में गुप्त मुलाक़ात
श्वानों का घुन्ना उत्पात...
सांप-चील का षड्यंत्र
छुछुंदर-नेवला सा ये तंत्र...
गिरगिटों का घुमड़ी परेड
मकड़ियों पर पड़ता रेड...
मधुमक्खियों में जो पड़ी फूट
मक्खियों को मिल गयी बम्पर छूट...
खच्चर-टट्टूओं में खटास
बन्दर-रीछों का लुभावना नाच...
चींटियों की ताबड़तोड़ तालियाँ
मच्छरों से छुपती नहीं गालियाँ...
चूहों में प्लेग विलायती
बिल्लियाँ बनी फिरती हिमायती...
हाईब्रिड हाथियों का मेला
शेर के हिस्से में कच्चा केला...
मगरमच्छों का आँसू-दर्शन
गोरिल्लाओं का अंग-प्रदर्शन...
ऊँटों का अनुभव ज्ञान
घोड़ों का बिना रुके सलाम...
अन्धेरा से होती फरमाइश
काले झंडों की चलती रहे नुमाइश...
हाय! हाय!
सूरज की छाती पर ही लट्ठम-लट्ठ
गड़बड़झाला भी है गड्डम-मड्ड...
देखो! बेल्ट में फँसाकर अपना पतलून
कितना मज़े में है सब नियम-क़ानून .