आँखों में सरसों फूला
फागुन अपना रस्ता भूला
पहुँच गया मरुदेश में
जित जोगी के वेश में
चिमटा बजाता , अलख जगाता
मस्ती में प्रेम - धुन गाता
प्रेम माँगता वह भिक्षा में
जित जोगिन की प्रतीक्षा में
कभी तो झोली भर जाएगी
जोगिनिया उसकी दौड़ी आएगी
अंबर से या पाताल से
वर लेगी उसे वरमाल से
हरा , गुलाबी , नीला , पीला
प्रेम का रंग हो इतना गीला
सब बह जाए उसी धार में
सुख सागर के विस्तार में
धुनिया का बस एक ही धुन
हर द्वार पर करता प्रेम सगुन
इस फागुन में सब रस्ता भूले
औ' आँखों में बस सरसों फूले .