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Thursday, March 1, 2012

लाजवंती


न जाने
किस बात पर आज
उनसे ही उनकी
ठनी हुई है
जो मेरे प्राणों-पंजर पर
विपदा सी बनी हुई है...
उनकी आँखें
इसतरह से है नम
कि बरस रहे हैं
मेरे भी घनघोर घन....
रूठे जो होते तो
बस मना ही लेती
अपने रसबतियों में
उन्हें उलझा ही लेती....
पर हवाओं से भी
वे कुछ न बोले
अपने पीर का भी
घूँघट न खोले.........
कोई बताये किस विधि
उनसे उनकी सुलह कराऊँ
और विह्वलता के
बूँद-बूँद को पी जाऊँ.....
ये ह्रदय -फूल
क्षण-क्षण मुरझाये
प्रस्तर-प्रतिमा से
जब वे हो जाए......
आखिर कब लेंगे
सुधि हमारी
मैं भी तो हूँ
बस उनकी ही प्यारी....
जब प्रीत किया है
तो क्यूँ न उनकी
दीवानी कहाऊँ
और मैं लाजवंती
लाज की हर मर्यादा को
बस उनके लिए ही
लाँघ -लाँघ जाऊँ .

41 comments:

  1. वाह...
    प्रेम और समर्पण भाव से भरी सुन्दर रचना..

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  2. उनकी आँखें

    इस तरह से है नम

    कि बरस रहे हैं

    मेरे भी घनघोर घन



    ...आँखों की नमी को आपसे बेहतर कौन पहचान सकता है अमृताजी..

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  3. लाज की हर मर्यादा को
    बस उनके लिए ही
    लाँघ लाँघ जाऊं...
    भाव भरी पंक्तियाँ...
    बहुत अच्छी प्रस्तुति,इस सुंदर रचना के लिए बधाई,...

    NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...

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  4. बहुत सुन्दर ...!

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  5. बेहतरीन भाव ...

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  6. उनके बाहर ही लाज की मर्यादा है..

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  7. बहुत सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति!

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  8. लाजवंती उनके लिए मर्यादा को लांघ जाऊं...
    वाह अमृता जी बहुत सुन्दर रचना. समर्पण के अद्भुत भाव... प्रेम की चरम सीमा...

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  9. वाह बहुत सुन्दर लजीली रचना जो बंधन तोडना भी चाहती है और मर्यादा मे भी रहना चाहती है

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  10. सुंदर समर्पण भाव ...!!
    बहुत सुंदर रचना अमृता जी ...!!

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  11. सुकोमल अभिव्यक्ति की कविता

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  12. शुक्रवारीय चर्चा मंच पर आपका स्वागत
    कर रही है आपकी रचना ||

    charchamanch.blogspot.com

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  13. भावपूर्ण रचना, हृदयस्पर्शी शब्द और प्रेम का सुन्दर वर्णन ..........आभार

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  14. लाज की हर मर्यादा को
    बस उनके लिए ही
    लाँघ लाँघ जाऊं...
    लाजवंती उनके लिए मर्यादा को लांघ जाऊं...
    मुग्धा कहलाऊँ .मुग्धा भाव की रचना .मुग्धा नायिका को होश ही खान रहता है .

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  15. मुग्धा कहलाऊँ .मुग्धा भाव की रचना .मुग्धा नायिका को होश ही कहाँ रहता है .

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  16. बहुत ही रोमांचक भाव

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  17. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  18. समर्पण का यथेष्ट प्रयास , लाज के घुंघट के साथ .

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  19. अमृता जी, एक नया अंदाज, बहुत सुंदर !

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  20. सुभानालाह.........पूर्ण समर्पण और बेहतरीन भाव........हैट्स ऑफ इसके लिए ।

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  21. बेहतरीन एहसास .. भाव

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  22. रूठे हैं पिया....अब तो मान ही जायेंगे.....प्रेम समर्पण से लबालब अद्भुत रचना

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  23. prem payodhi ka karaiye paan,
    chandni smit roop ka karaiye dhyaan,
    bikhra ke unpe apni ghani kesh raashi,
    prem ki barish kar unhe karaiye snaan...

    Amrita,bebaak kavya lekhan ke liye badhayee...ek ek shabd page huye prem ras mein...unmatt ho gaya padh kar....behad bhavpoorn...

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  24. THE PICK OF LOVE.
    THE FRAGERENCE OF DEVOTION AND DEDICATION IN LOVE
    MAY COME THIS WAY.
    NICE POST. BHAJAN KA AANAND LEN.

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  25. वाह वाह ..बहुत सुंदर प्रस्तुति ...बधाई ;)

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  26. समर्पण की सहज अभिव्यक्ति।
    सुन्दर रचना।
    धन्यवाद।
    आनन्द विश्वास

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  27. लाज की हर मर्यादा को
    बस उनके लिए ही
    लाँघ लाँघ जाऊं...
    भाव भरी पंक्तियाँ...
    लाज की हर मर्यादा को
    बस उनके लिए ही
    लाँघ लाँघ जाऊं...
    भाव भरी पंक्तियाँ...
    बहुत अच्छी प्रस्तुति,इस सुंदर रचना के लिए बधाई,...

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  28. मनोभावों की सुंदर अभिव्यक्ति।

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  29. shookshm bhaawon ka prabhaawapoorn chitran !

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  30. पहली बार आना हुआ ..आपके ब्लॉग पर .यह भाव बहुत ही बारीकियों के साथ प्रस्तुत किया है आपने...वास्तव में बिलकुल ऐसा ही महसूस होता है...बधाई !

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  31. बहुत खूब ... प्रीत में हर सीमा को लांघ जाने की चाह ... सच में प्रीत को नए उकाम तक ले जाती है ... अच्छे भाव ...

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  32. अमृता जी होली की शुभकामनाएँ |

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  33. बस पड़ताही जा रहा हूँ .लिखने लायक शब्द मिलते ही लिखूंगा .अभी तो भावसागर में ही डूबता जा रहा हूँ.इसी तरह आप बरसती रहे और पाठकगन भव मगन होते रहे .भावों को इतने कलापूर्ण डंग से प्रतिबिंबित करवाने की कला में आप का सानी नहीं है.आप के ऐसे ही प्रेम काब्य की सतत इंतजार में आप का एक पाठक ....

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  34. मनोभावों की सुंदर अभिव्यक्ति। होली की शुभकामनाएँ|

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  35. मुग्धा भाव की सशक्त रचना .होली मुबारक .

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  36. बहुत सशक्त भावमयी रचना...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  37. अदभुत, बेहतरीन, लाजबाब.
    आपकी सशक्त भावपूर्ण प्रस्तुति पर
    कुछ और कहने के लिए शब्द नहीं हैं
    मेरे पास.

    प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार.
    होली की आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ.

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  38. होली की हार्दिक शुभकामना। बेहतरीन कविता के लिए भी शुक्रिया। प्रवाह में बहाने वाली कविताएं फढ़कर अच्छा लगता है।

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  39. लाजवंती को प्रेम से सराबोर नया बिंब दिया है आपने. बेहतरीन.... बेहतरीन....कविता.

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  40. होली की बहुत बहुत रंगों भरी शुभकामनाएं ..

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