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Tuesday, January 3, 2012

कर्फ्यु


मेरे मन के
शांत संसार में
कुछ असामाजिक
विचारों ने अनायास
कर दिया है
बम - धमाका
पुनर्शान्ति के लिए
लगा दिया है
मैंने भी कर्फ्यु..
पर कविता तो
छूट गयी है
उन्हीं विचारों के
अभेद्य दुर्ग में..
न जाने कैसे
लुट-पीट रही होगी
और उसे
बचाने के लिए
रोक रही हूँ
मैं भी कलम .

40 comments:

  1. कविता विचारों के अभेद्य दुर्ग से ही निकलती है...

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  2. kalam ko rokane ka to koi kaaran nahi dikhta hain.
    likhte rahiye
    nice lines

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  3. अंतर्द्वंद्व ...बहुत सुंदर

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  4. गहन अहसासों से परिपूर्ण एक सशक्त प्रस्तुति...

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  5. वो तो रास्ता निकाल ही लेगी बहार आने का .....!बल्कि अबकी कुछ गज़ब के भाव लिए आएगी ....!!

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  6. अशांत मन में कैसी कविता!!!!!!

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  7. अंतरद्वंद पर सुन्दर प्रस्तुति

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  8. कृपया आप अपनी कलम ना रोकें.. थोड़ा विश्राम कर ले.

    नए वर्ष की मंगलकामनाएं.

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  9. ये भी होता है। नववर्ष की शुभकामनायें!

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  10. हलचल आती, थम जाती है,
    समय बहुत लेने के बाद।

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  11. निकल कर हलचल मचाने लगी।

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  12. नव-वर्ष की मंगल कामनाएं ||

    धनबाद में हाजिर हूँ --

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  13. अंतर्द्वान्दीय कर्फ्यू ...
    कविता कर्फ्यू में नहीं फसेगी

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  14. कोई फ़िक्र नहीं, कविता बड़ी सख्तजान है..सब कुछ झेल कर भी सुरक्षित निकल आयेगी...

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  15. शब्द शब्द बेजोड़...बधाई

    नीरज

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  16. बेहतरीन और गहन भावों से सजी हुई रचना ...

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  17. बेहतरीन भाव संयोजन ।

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  18. सुन्दर प्रस्तुति, अच्छी रचना,
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !

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  19. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट " जाके परदेशवा में भुलाई गईल राजा जी" पर आपके प्रतिक्रियाओं की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । नव-वर्ष की मंगलमय एवं अशेष शुभकामनाओं के साथ ।

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  20. अमृता जी,
    यह गज़ब मत कीजिएगा .
    कलम को मत रोकियेगा.
    आपके कितने पाठक जां बहक हो जायेंगे.

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  21. कविता बाहर आने का रास्ता खोज ही लेती है.संक्रमण काल से गुजरने के दौरान व्यक्ति की तरह कविता भी निखरती है.अगर कविता की सीमा दिख रही हो तो निबंध ,रेखाचित्र या अन्य विधाओं का सहारा लिया जा सकता है.असामाजिक विचारों की बात और कर्फ्यू का रिश्ता पूरी तरह समझ में नहीं आया.

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  22. जीवन के विभिन्न सरोकारों से जुड़ा नया ब्लॉग 'बेसुरम' और उसकी प्रथम पोस्ट 'दलितों की बारी कब आएगी राहुल ...' आपके स्वागत के लिए उत्सुक है। कृपा पूर्वक पधार कर उत्साह-वर्द्धन करें

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  23. बहुत ही लाजवाब... मन के उद्दवेलन को बड़ी खूबसूरती से पेश करती रचना..
    आभार..

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  24. बहुत सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

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  25. कड़े से कड़े कर्फ्यू में भी ढील दी जाती है......हम इंतज़ार करेंगे|

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  26. बहुत सुंदर अहसासों की प्रस्तुति,मगर मुझे कर्फ्यू से डर लगता है
    कारण १२ घंटे तक कर्फ्यू में फसा रहा,मुशिकल से जान छुटी...

    WELCOME to new post--जिन्दगीं--

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  27. रचना से प्रभावित होकर मै आपका समर्थक बन रहा हूँ,निवेदन है कि आप भी बने,तो मुझे हार्दिक खुशी होगी,....

    WELCOME to new post--जिन्दगीं--

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  28. कविता को बचाने के लिए कलम को रुकने की नहीं , चलने की जरुरत है.... !! एक अच्छी प्रस्तुति.... :)

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  29. He kalam chalti rahni chahiye tabhi ye karfu khatam Bhi hoga .... Umda rachna ...

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  30. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !
    बहुत ख़ूबसूरत रचना !

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  31. अरे बाप रे बाप!
    कहाँ से आये ये असमाजिक विचार.
    अब तो बम निरोधक यंत्र की भी जरुरत पड़ेगी जी.

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  32. बहुत अच्छी रचना,सुंदर प्रस्तुति
    नई रचना-काव्यान्जलि--हमदर्द-

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  33. भीतर की अशांति पर भी कर्फ्यू लगाना पड़ता है. सुंदर कविता.

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