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Saturday, January 14, 2012

हैया-हो ...


हर तूफान  से जीत जाना है
हैया-हो  ,  हैया-हो  गाना  है

नहीं गिरने में  क्या  सौरभ
गिर कर  उठने  में है गौरव
जितना  आये  बाधा  रौरव
ललकारे हैया-हो का आरव

विकराल  सा भँवर  का  डर
घेरता   रहे  कहीं  से आकर
जीतना  है  उन से  लड़ कर
हैया-हो  , हैया-हो   गा  कर

लहरों में  बस उतर  आना है
तूफानों के  बीच में  जाना है
सदा  पतवार  को चलाना है
हैया-हो ,  हैया-हो   गाना  है

किनारे पर  है सूखा सौन्दर्य
निर्जीव शांति,निष्क्रिय धैर्य
लहरों से  खेलने  में  है शौर्य
तब  हैया-हो  देता है  ऐश्वर्य

जिसे लहरों में उतरना  आता
उस साहस से सब  है  थर्राता
लहरों  के पार  वही  है  जाता
और झूम के हैया-हो है गाता

हर तूफान  से  जीत जाना है
हैया-हो ,  हैया-हो   गाना   है .



रौरव - भयंकर
आरव - तीव्र ध्वनि



47 comments:

  1. behtreen kavy....samst shringar liye..
    mere blog par aapka intjaar rahega..

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  2. अदम्य साहस देती हुई ....थकन भगाती हुई ....बस कूद पड़ो ...जोश से भरी बहुत सुंदर रचना ....मैंने गाना प्रारंभ कर दिया ...हैया हो ...हैया हो...

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  3. रक्त संचार को बढ़ाती रचना

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  4. बहुत बेहतरीन शब्दों का संयोजन !
    आपकी हैया हो...एक नई उर्जा भर रही है !
    आभार !

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  5. वीरांगना अमृता की अलहदा कलम.....

    आपकी ललकार पर कौन न मिट जाए......

    मुझे आपकी इस रचना पर हमेशा गर्व रहेगा ............राहुल

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  6. Wah!!! Utsah se paripurn....makkam iradon wali kavita....

    Behtareen...."Haiya ho, haiya ho gaana hai....."

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  7. सकारात्मक सोच के साथ लिखी गई प्रेरक रचना

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  8. जीवन ऐसे ही जोश और उत्साह में निकल जाये

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  9. लहरों में बस उतड़ आना है
    तूफानों के बीच में जाना है
    सदा पतवार को चलाना है
    हैया-हो , हैया-हो गाना है

    जीवन को प्रेरणा देती आपकी यह रचना निश्चित रूप से प्रासंगिक है .

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  10. लहरों में बस उतड़ आना है
    तूफानों के बीच में जाना है
    सदा पतवार को चलाना है
    हैया-हो , हैया-हो गाना है

    जीवन को हौसला और साहस देती आपकी रचना ....!

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  11. हैया हो ही तो एक सहारा होता है जब आदमी खून पसीना एक करके थक जाता है और मंज़िल की ओर बढ़ता जाता है।

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  12. पुरुषार्थ के प्रति...एक रचना...

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  13. मन में उत्साह भरती अच्छी रचना .

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    1. sunder abhivyakti ......maan ka uttsah badhai hui .

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  14. आपकी इस रचना में आपके अन्दर के उत्साही इंसान की झलक मिलती है. एक पल को तो मै हैरान रह गया.यूँ लगा जैसे ख़ामोशी से बहता कोई दरिया उछालें ले रहा हो. जो उसके स्वभाव के विपरीत लग रहा हो. इंसान के बारे में कोई धारणा बनाना सही नहीं है. यह जानने के बावजूद भी हम उसकी कोई न कोई छबि अपने मन में बना ही लेते हैं. कुछ नया पढकर और आपके एक नए पहलू से रूबरू होकर अच्छा लगा. इस रचना से मुझे अतीत के दिनों की याद हो आई. जब मै खुद अपने आप से और अपने आस-पास के परिवेश से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ रहा था. शुक्रिया उन दिनों की याद दिलाने की लिए..

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  15. उत्साह का संचार करती रचना ....

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  16. बढ़िया प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 16-01-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  17. एक नए उत्साह का संचार करती सुंदर प्रस्तुति लगी. बधाई.

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  18. उत्‍साह के बिना सब कुछ नीरस है....

    भावपूर्ण रचना।

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  19. जीत जाने की भावना प्रशंसनीय है. बहुत बढ़िया रचना.

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  20. आप की कविता तो मुर्दों में भी नवजीवन का संचार कर देगी .हम सभी अक्षय उर्जा के ही तो प्रतिरूप है .यह जो इर्द गिर्द निराशाओं के बदल फैले हुए हैं वह तो हमारे मन के अधोगामी प्रभाव के चलते ही है.एक जोर का हैया हो और जीवन फिर आशा से परिपूरन और दिखाती हुई कठिनाइय बर्फ की मानिंद पिघलती हुई.आशा है आपकी कविता मानवता को जीने की सन्देश दे गी .मकर संक्रांति की शुभ कामनाओं के साथ.

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  21. आप की कविता तो मुर्दों में भी नवजीवन का संचार कर देगी .हम सभी अक्षय उर्जा के ही तो प्रतिरूप है .यह जो इर्द गिर्द निराशाओं के बदल फैले हुए हैं वह तो हमारे मन के अधोगामी प्रभाव के चलते ही है.एक जोर का हैया हो और जीवन फिर आशा से परिपूरन और दिखाती हुई कठिनाइय बर्फ की मानिंद पिघलती हुई.आशा है आपकी कविता मानवता को जीने की सन्देश दे गी .मकर संक्रांति की शुभ कामनाओं के साथ.

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  22. जीवन के सकारात्मक पहलू को स्पर्श करती रचना
    हैय्या हो ....

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  23. सुन्दर शब्दों से सजी सुन्दर रचना.

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  24. शब्‍द चयन लाजवाब.

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  25. बहुत ही सार्थक व सटीक लेखन| मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  26. BAHUT HI URJA KA SANCHAR KARANE WALI RACHANA LAGI AMRITA JI BAHUT BAHUT BADHAI.

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  27. दिल में जोश जगाती बहुत बढि़या कविता।

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  28. बहुत सुन्दर रचना है बधाई।

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  29. जोश जगाती उत्साह बढाती जीवन संचार बढाती बेहतरीन सुंदर रचना,...

    new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

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  30. उत्साह का संचार करती बेहतरीन रचना।

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  31. वाह..! उत्साहवर्धक कविता..
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है..
    kalamdaan.blogspot.com

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  32. जोश और होश बना रहे तो जीवन एक उत्सव बन जाता है...बहुत सुंदर कविता !

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  33. इतना उत्साहित किया इस कविता ने की मै उद्दिग्नता भुलाकर चला आया . आभार

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  34. माफ़ कीजिये मुझे पसंद नहीं आई ये पोस्ट :-(

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  35. प्रभावशाली एवं सशक्त रचना बधाई...

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  36. जोर लगाओ हे हिस्सा ,जोर लगाओ ओ हिश्षा का यही मूल मन्त्र है सामूहिक ऊर्जा जागृत होती है इस सम्मिलित स्वर से .बड़े से बड़ा लठ्ठा उठा लेतें हैं श्रमिक इस नाद से .सुन्दर प्रस्तुति

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  37. जोश जगाती सुंदर रचना,...
    वाह बहुत खूब.. उम्दा

    मैं आपको मेरे ब्लॉग पर सादर आमन्त्रित करता हूँ.....

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  38. सुन्दर सशक्त रचना..

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  39. आपके हर पोस्ट नवीन भावों से भरे रहते हैं । पोस्ट पर आना सार्थक हुआ। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  40. लहरों में बस उतडना है जिसे, लहरों में उतडना आता है ,यदि उतडना जन भाषिक प्रयोग नहीं है तो उतरना कर लें .

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  41. लहरों में बस उतड आना है है जिसे, लहरों में उतडना आता है ,यदि उतडना जन भाषिक प्रयोग नहीं है तो उतरना कर लें .उतर आना कर लें .चढ़ना और उतर ना प्रयुक्त होतें हैं .

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  42. दैया-हो!
    कितनी उर्जा देता है
    हैया-हो!!
    ..बहुत अच्छी लगी यह कविता भी।

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  43. गजब,अदभुत,लाजबाब
    हैया हो,हैया हो
    आपने तन्मय के साथ विस्मय कर दिया.
    लगता है जोश का सागर ही उमड़ आया हो.

    शानदार प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

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  44. बहुत ही सुन्दर भाव भीनी कविता
    मैं गोताखोर मुझे गहरे जाना होगा
    तुम तट पर बैठ भंवर की बातें किया करो
    भवानी प्रसाद मिश्र जी की लाइन आपको भेंट

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