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Tuesday, November 29, 2011

आहों में ..


चलते-चलते थक जाती
पाती  न   पंथ की सीमा
अवरोधों से डिगता धैर्य
फिर भी  न  होता धीमा

प्यासी  आँखे  बहती  है
बूंद-बूंद   में हुआ जीना
चिर अतृप्त  सा जीवन
अंजुरी  भर  चाहूँ  पीना

न मिले  तृप्ति  कणभर
सागर और भी तरसाया
इक आकाश  की चाह ने
मुझको  है बस भरमाया

अंतरदृग  में  वही  छवि
हर  इक  पल   रहती  है
जो वह  कह  नहीं  पाया
वो सबकुछ ही कहती है

हाथ  बढ़ा  छू  लूँ  उसको
भींच  लूँ  अपनी बांहों में
पाने में तो  खो दिया उसे
खोकर पा लिया आहों में  .




42 comments:

  1. अंतरदृग में वही छवि
    हर इक पल रहती है
    जो वह कह नहीं पाया
    वो सबकुछ ही कहती है
    ... yah aatmshakti hai , jo chahaa sunti hai, bahut badhiyaa

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  2. खोना और पाना एक ही स्थिति के दो क्षण हैं. व्यक्ति प्रथमतः अपने आप से जुड़ा है. इसीलिए वह पाने में खोता है और खोने में पा लेता है. बहुत ही सुंदर कविता और भाव.

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  3. राह मिलेगी, चाह मिलेगी..

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  4. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति| तीसरा पैरा सबसे अच्छा लगा|

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  5. खूबसूरत रचना .......

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  6. भावमय करते शब्‍दों का संगम ..
    कल 30/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, थी - हूँ - रहूंगी ....

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  7. बहुत बहुत बधाई ||


    सुन्दर प्रस्तुति ||

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  8. गहन संवेदनशील...बहुत सुंदर अल्फाज़ ...
    अंजुरी भर की इच्छा हो ...बूँद बूँद से कहाँ मन भरता है ...कई बार पढ़ी फिर भी प्रशंसा के लिए शब्द ढूँढ रही हूँ ....!!

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  9. न मिले तृप्ति कणभर
    सागर और भी तरसाया
    इक आकाश की चाह ने
    मुझको है बस भरमाया

    इश्क की चाह और भरमाना ....वाह क्या बात है ...!

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  10. बेहतरीन और सार्थक अभिव्यक्ति ...

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  11. bahut hii sundar rachna

    यादों मैं पाना और छूना
    सम्मोहन एक परछाई सा
    और नहीं तो कुछ पल ही
    बस नाम किसी के कर देना है
    यादों ही यादों से अपने
    अंतर्मन को भर देना है

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  12. भावो का सुन्दर चित्रण...

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  13. ख्नोने में जो मज़ा है वो पाने में कहां!

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  14. प्रभावशाली अभिवयक्ति....

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  15. खोने पाने का विषम दर्शन सुन्दरता से संप्रेषित!

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  16. सुन्दर पंक्तियां..कण भर तृप्ति नहीं और आकाश भरमा रहा है।

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  17. खोने पाने का यह सिलसिला यूँ ही चलता रहता है ..... आपने इसे सुंदर शब्द दे दिए ..

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  18. सुंदर रचना।
    गहरे भाव....

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  19. पाने में तो खो दिया उसे , खोकर पा लिया आहों में ...बहुत सुंदर

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  20. अपने चर्चा मंच पर, कुछ लिंकों की धूम।
    अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।।

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  21. behtarin shabdo ka sangam
    evam laybadh rachna ...!
    bahut sundar..!

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  22. पीड़ा की गहन भावपूर्ण कविता -इतनी गहनता वाली कवितायें न लिखा करें प्लीज कलेजा मुंह को आता है :)

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  23. पाने और खोने मे भी एक आनन्द है ये आंख मिचौली करने मे उसे भी आनन्द आता है।

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  24. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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  25. भाव गीत रस गीत सुनाई , .कविता बेहद मन को भाई .खोना भी तो पाना है आँखों ने खोया दिल ने पाया तसव्वुर में पाया .वो फिर से आँखों में समाया कहाँ खोया कहाँ पाया .

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  26. आपका पोस्ट मन को प्रभावित करने में सार्थक रहा । बहुत अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट 'राही मासूम रजा' पर आकर मेरा मनोबल बढ़ाएं । धन्यवाद ।

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  27. आपकी आहों की शक्ति गजब की हैं जी.
    सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति पढकर मन मग्न हो
    गया है मेरा.

    बहुत बहुत आभार,अमृता जी.

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  28. मन के भावों का खूबसूरत चित्रण ..
    मेरे नए पोस्ट "प्रतिस्पर्धा" में है इंतजार,...
    पिछली पोस्ट में आने के लिए दल से आभार ...

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  29. खोकर पा लिया आहों में ....

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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  30. पाने की चाह ने उसे गंवाया है, वह है ही ऐसा कि खोकर ही उसे पाया जाता है... सुंदर कविता!

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  31. PAANE ME TO KHO DIYA USE
    KHO KAR PAA LIYA AAHON ME ...

    USE PAANE KA AUR KOI TAREEKA BHI NAIHI THA NA MERE PAAS.

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  32. धन्यवाद् मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और सुन्दर टिपण्णी करने के लिए
    आपने पूछा है की हिंदी से लगाव है या नहीं, जवाब है
    हिंदी से बेहद ज्यादा लगाव है लेकिन पहले मै सोचता था की हिंदी में उतने अच्छे ब्लॉग नहीं होंगे, इसलिए मैंने इस ब्लॉग को इंग्लिश में बनाया. लेकिन आपका और ऐसे बहोत सरे ब्लॉग पर आ के मेरा शक दूर हुवा
    वैसे भी मई जहा पर जॉब कर रहा हूँ वह पर जसे तैसे थोडा सा समय चुराकर ब्लोगिंग करने मिलता है, और वैसे भी हिंदी टाइपिंग नहीं करी है इसलिए इसलिए इंग्लिश में लिखना आसान लगता है
    smart people

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  33. प्यासी आँखे बहती है
    बूंद-बूंद में हुआ जीना
    चिर अतृप्त सा जीवन
    अंजुरी भर चाहूँ पीना....

    umda srijan ! aur gahare bhaav !

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  34. रचना बहुत सुन्दर है, बधाई.

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  35. चाने से कौन किसी को पाता है ... असल पाना तो खो कर ही आता है ... उम्दा प्रस्तुति ...

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