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Wednesday, January 9, 2013

केवल एक युक्ति है ...


मैंने अब धारा की
उस प्रचंडता को पहचान लिया है
व अपने अनुरूप ही
हर ढाल का भी निर्माण किया है...
ये भी माना कि
प्रवाह-शक्ति बड़ी मद से भरी है
पर सामने भी तो
कई भीमकाय बाधाएँ भी खड़ी है...
जहाँ निषेध है
वहाँ उद्रेकता में उछल जाती हूँ
और मूल से ही
हर पाषाण को रेत-रेत कर जाती हूँ...
ऐसे न बहूँ तो
ये जो तृषा है शांत कैसे होगी ?
कुछ कमल व हंसों में
मानसरोवर की गति जैसे होगी...
गर्जन-तर्जन करके
सारी वर्जनाओं को तोड़ देना है
पोखरों में ही सिमटी हुई
अन्य धाराओं को भी जोड़ लेना है...
सच! बहने में ही
हम सबों की अंतिम मुक्ति है
यही नियति है और
यही एक और केवल एक युक्ति है .


40 comments:

  1. सच! बहने में ही
    हम सबों की अंतिम मुक्ति है
    यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है .
    बिल्‍कुल सच कहा आपने इन पंक्तियों में

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  2. और मूल से ही
    हर पाषाण को रेत-रेत कर जाती हूँ...
    -----------------------------------
    कितना अद्भुत ... बता नहीं सकता ...

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  3. सार्थक एवं सटीक पंक्तियाँ

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  4. आपकी इस पोस्ट की चर्चा 10-01-2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत करवाएं

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  5. सच! बहने में ही
    हम सबों की अंतिम मुक्ति है
    यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है .....और यही आज की ज़रुरत भी है .....

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  6. बहुत ही सुन्दर कविता |आभार

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  7. Amrita,

    AAGE BARHNAA AUR JO AAS PAAS SAATH HON UNKO BHI SANG LE JAANAA HI SAHI HAI.

    Take care

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  8. यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है,,,,

    सटीक सार्थक पंक्तियाँ,,,,,

    recent post : जन-जन का सहयोग चाहिए...

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  9. गत्यमान रहना ही ज़िन्दगी है. स्थावर होने से चिर समाधि अच्छी. सुन्दर रचना.

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  10. VERY DEEP FEELINGS @@@@@@सच! बहने में ही
    हम सबों की अंतिम मुक्ति है
    यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है .

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  11. गर्जन-तर्जन करके
    सारी वर्जनाओं को तोड़ देना है

    वाह !!!!!!!!!!!!

    सार्थक रचना...

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  12. सार्थक पोस्ट!
    पोखर में नही सिमटना है...
    सब धाराओं को साथ समेटना है...
    और बहते जाना है...
    ~सादर!!!

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  13. पोखर में नहीं सिमटना है ....
    सन्देश प्रभावी है !

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  14. मुट्ठी बन जाना ही आधार है

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  15. बेहतरीन .... धारा का प्रवाह भी तेज़ होना चाहिए ...

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  16. बहना मुक्ति के लिए ... पर दिशा निर्धारित करके ...
    सफलता मिलती है ...

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  17. बहना ही मुक्ति है ……………सु्न्दर संदेश देती रचना

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  18. अनादी kaal से प्रवाहित यह शाश्वत धारा स्थान काल और पात्र को समाहित किये चला आ रहा है.स्थूल से सुक्ष्म और फिर सुक्ष्म से स्थूल यह ही प्रवाह है.सिर्फ मन से ही बोध होता रहता है की कांहीं कोई अवरोध है या गति शुन्य है पर ऐसा होता ही नहीं .मन की इस अवस्था ka ek satik sa chitran .

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  19. सचमुच...बहते जाना ही नियति है..सारी बाधाओं को पार करते हुए..प्रेरक पंक्तियाँ...आभार अमृता जी !

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  20. सशक्त अभिव्यक्ति आधी दुनिया का आवाहन उद्दाम आवेग एक बलवती वेगवती धारा सब कुछ को बहा ले जाने की क्षमता रखता है उससे पहले यहाँ कुछ होना भी नहीं है .

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  21. हम सबों की अंतिम मुक्ति है
    यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है .
    BAHUT HI BADHIYA....

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  22. साधू .... आ.अमृता जी ।

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  23. बहुत ही बेहतरीन सार्थक रचना...

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  24. बहने में मुक्ति की बात काबिल-ए-गौर है। सुंदर रचना के लिए शुक्रिया।

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  25. शाश्वत बहना...
    बहते जाना ही गति है इस जीवन की.....!
    सुन्दर....
    अति सुन्दर.....

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  26. सागर तक गर जाना है,
    पानी सा बह जाना है।

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  27. सच! बहने में ही
    हम सबों की अंतिम मुक्ति है
    यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है .

    शाश्वत सत्य........बहुत ही सुन्दर ।

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  28. गर्जन-तर्जन करके
    सारी वर्जनाओं को तोड़ देना है
    पोखरों में ही सिमटी हुई
    अन्य धाराओं को भी जोड़ लेना है...
    सच! बहने में ही
    हम सबों की अंतिम मुक्ति है
    यही नियति है और
    यही एक और केवल एक युक्ति है .

    yahi यही अब भारत की हरेक युवती का संकल्प है .

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  29. Baho nadi baho anvarat apratihat aviram.. Jhuke sheesh sagar karata tera abhiram!

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  30. गर्जन-तर्जन करके
    सारी वर्जनाओं को तोड़ देना है
    पोखरों में ही सिमटी हुई
    अन्य धाराओं को भी जोड़ लेना है...

    ....इसी ज़ज्बे की आज ज़रुरत है..बहुत विचारोत्तेजक सशक्त अभिव्यक्ति...

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  31. सच! बहने में ही
    हम सबों की अंतिम मुक्ति है

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  32. गति ही जीवन. रुकने से सदन होती है. सुंदर कविता.

    लोहड़ी, मकर संक्रांति और माघ बिहू की शुभकामनायें.

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  33. बहुत बढि़या..लोहड़ी, मकर संक्रांति की शुभकामनायें...

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  34. आप से बैठकर कविताओं पर बातें करने का मन है।

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