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Wednesday, February 3, 2016

एक रंग में रंगे हैं ......

एक रंग में रंगे हैं गिरगिट
गला जोड़कर , गा रहे हैं गिटपिट-गिटपिट

एक रंग में रंगे हैं मकड़े
सफाई-पुताई को ही झाड़े , झाड़ू पकड़े

एक रंग में रंगे हैं छुछुंदर
कब किस छेद से बाहर , कब किस छेद के अंदर

एक रंग में रंगे हैं मेंढक
लोक-वाद लोककर , जाते हैं लुढक-पुढक

एक रंग में रंगे हैं साँप
जब-तब केंचुली झाड़कर , देते हैं झाँप

एक रंग में रंगे हैं घड़ियाल
घर-घर घुस जाते , लिए जाली जाल

एक रंग में रंगे हैं बगुले
गजर-बाँग लगा , लगते हैं बड़े भले

एक रंग में रंगे हैं गिद्ध
मुर्दा-मर्दन का अंत्येष्टि करके , हुए प्रसिद्ध

एक रंग में रंगे हैं लोमड़ी
मुँह से लहराकर , रसीले अंगूरों की लड़ी

एक रंग में रंगे हैं सियार
यार-बाज़ी के लिए , एकदम से तैयार

एक रंग में रंगे हैं हाथी
हथछुटी छोड़ , हों चींटियों के सच्चे साथी

एक रंग में रंगे हैं गधे
शेर की खाल ओढ़ने में , कितने हैं सधे

इसी एक रंग से रंगती हैं सरकार
रँगा-रँगाया , रंगबाज़ , रंगरसिया, रंगदार

जिनके हाथों के बीच के हम मच्छड़
जाने कब ताली पीट दे या दे रगड़

इनसे बचने का तो एक भी उपाय नहीं
हाँ! जी हाँ! हम मच्छड़ ही हैं कोई दुधारू गाय नहीं .

16 comments:

  1. वाह....बेहतरीन और कुछ अलग सा अंदाज़

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  2. आज तो सारा चिड़ियाघर ही समा गया है कविता में..और अंतिम पंक्तियों का तो जवाब नहीं..वाकई आम आदमी की हैसियत ही क्या है..

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  3. इतने दिनों की अभिव्‍यक्ति का सूखा आपने इस एक रचना से लबालब भर दिया। गजब खींच के मारा है गधे-मच्‍छरों को।

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 04-02-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2242 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  5. भावपूर्ण ,शानदार .आपको बधाई.

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  6. सभी को लपेट लिया, हर जानवर को ... पर सरकार फिर भी सरकार ... बेबाक चित्रण ...

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  7. ख़ूब .... बेहतरीन पंक्तियाँ हैं

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  8. सच में इनसे बचने के कोई आसार नहीं। बहुत ही सटीक अभिव्यक्ति।

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  9. सच में इनसे बचने के कोई आसार नहीं। बहुत ही सटीक अभिव्यक्ति।

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  10. बहुत सुन्दर, प्रभावी शैली और संवाद।

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  11. वाह सुंदर. सरल. प्रवाहमयी .

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  12. सुन्दर और भावपूर्ण कविता।

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  13. हर रंग सियासत का दरिंदों की देन है. मच्छर निरीह कीट-पतंगों से परिंदे.
    बहुत बढ़िया तस्वीर आपने बनाई है.

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  14. बेहद मार्मिक। समसामयिक भी।

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  15. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 12/02/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 210 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

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  16. सच तो यही है....

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