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Tuesday, December 17, 2013

क्षणिकाएँ ......

जैसे इस विराट अस्तित्व में
खोये को खोज लेने की
कोई युक्ति नहीं होती
वैसे ही जीवन को
समग्रता से जीने के लिए
सर्वमान्य कोई सूक्ति नहीं होती .

         ***

जैसे हजारों फूलों को
निचोड़-निचोड़ कर
उत्तम इत्र बनाया जाता है
वैसे ही जीवन की चुनौतियों को
बड़े ही प्यार से
मचोड़-मचोड़ कर
अपना मित्र बनाया जाता है .

         ***

जैसे सागर तक पहुँचने के लिए
नदी को किनारे से
बंधा रहना पड़ता है
वैसे ही लक्ष्य पाने के लिए
प्रत्येक कदम को
हर अगले कदम से
जोड़े रखना पड़ता है .

         ***

जैसे भूख मर जाती है तो
सुन्दर से सुन्दर भोजन भी
देखते-देखते मर जाता है
वैसे ही समय को
मलहम बना लेने पर
हरा से हरा घाव भी
पूरा ही भर जाता है .

         ***

जैसे धूल तलहटी में बैठती है
तो झरना फिर से
स्वच्छ और साफ़ हो जाता है
वैसे ही बौद्धिकता का
रंगीन आवरण हटाते ही
वही बुद्धू बच्चा सा मन
अपने आप हो जाता है .

27 comments:

  1. जीवन की समग्रता, मित्र, सागर, घाव, झरना का क्षणिका मे अनुपम प्रयोग

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  2. बहुत ही सुन्दर भाव ..............

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  3. बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएं.....
    दूसरी सबसे प्यारी............................
    अनु

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  4. क्षण में अनमोल वचन का प्रभाव डालती क्षणिकाएं

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  5. बुद्धू बच्चा ही खुश रह सकता है...सुन्दर क्षणिकायें...

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  6. बढ़िया क्षणिकाएं आदरेया-
    आभार आपका-

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  7. कोई युक्ति नहीं होती यह भी तो एक युक्ति ही है न...

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  8. सारी की सारी क्षणिकायें अनुभव के ज्ञान से भरीं।

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  9. बौदि्धकता का विचलित करता आवरण निश्‍चय ही संघाती है। सरल, सुबोध और गहन विश्‍लेषण से सृजित क्षणिकाएं।

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  10. सरल, सुबोध और गहन विश्‍लेषण से सुसजित बहुत ही सुंदर क्षणिकाएं।

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  11. व्यावहारिक सत्य से साक्षात्कार कराती सुंदर क्षणिकाएं।

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  12. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.

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  13. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 19-12-2013 को चर्चा मंच पर टेस्ट - दिल्ली और जोहांसबर्ग का ( चर्चा - 1466 ) में दिया गया है
    कृपया पधारें
    आभार

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  14. सत्य कहती सुंदर क्षणिकाएं....!!

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  15. उम्दा क्षणिकाएं !!

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  16. अनचाहे जख्मों पर शीतल लेप की तरह है ये
    क्षणिकाएं ... हर तरफ से परिपूर्ण व मजबूत...

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  17. सभी क्षणिकाएं सार्थक भाव लिए ... कुछ न कुछ सोचने और "सही बात" कहने को विवश करती हैं ...

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  18. जैसे हजारों फूलों को
    निचोड़-निचोड़ कर
    उत्तम इत्र बनाया जाता है
    वैसे ही जीवन की चुनौतियों को
    बड़े ही प्यार से
    मचोड़-मचोड़ कर
    अपना मित्र बनाया जाता है.... .बहुत सुंदर क्षणिकाएँ..... जीवन को प्रेरित करती हुई .......

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  19. सभी बहुत ही बढ़िया हैं |

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  20. उम्दा क्षणिकाएँ. (क्षमा सहित)आखिरी क्षणिका को मैंने ऐसे पढ़ा है-

    वही बुद्धू बच्चा सा मन
    अपने आप प्रबुद्ध हो जाता है .

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