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Saturday, July 28, 2012

क्षणिकाएँ...


एक जरा सी शुरूआत भी
बला की तूफ़ान ले आती है
फिर तो हलकी सी थपकी भी
जोरदार चपत लगा जाती है .

           ***

कोई कैसे बताये कि
कौन किसपर भारी है
हँस जीते या फिर बगुला
सिक्का-उछालू खेल जारी है .

           ***

गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
क्या खूब गुदगुदाती है
और बाँकी बर्बरता बैठकर
मजे में चने चबाती है .

           ***

टिमटिमाती मशालों की टीमटाम
हेठी दिखा कर हेल देती है
बरजोरी में अग्निशिखाओं को भी
एकदम पीछे धकेल देती है .

           ***

अनेक को एक ही सोंटे से
सोंटने में ही एकता है
जो ताखा चढ़ तूंबी बजाये
वो ही तुरुप का पत्ता है .


35 comments:

  1. सभी क्षणिकाओं का अपना खूबसूरत रंग है. ये दो बहुत अच्छी लगीं-

    (1)
    कोई कैसे बताये कि
    कौन किसपर भारी है
    हंस जीते या फिर बगुला
    सिक्का-उछालू खेल जारी है.

    (2)
    गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
    क्या खूब गुदगुदाती है
    और बाँकी बर्बरता बैठकर
    मजे में चने चबाती है.

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  2. सिक्का उछालू खेल जारी है.... बहुत खूब.... वाह!!!
    सभी क्षणिकायेँ आसपास चहलकदमी करती महसूस होती हैं...
    सादर बधाई स्वीकारें।

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  3. वाह....आखिरी वाला सबसे बढ़िया ।

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  4. sabhi behad pasan aayeein per sikka ucchaloon khel jaari bishesh roop se pasand..sadar badhayee ke sath

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  5. कोई कैसे बताये कि
    कौन किसपर भारी है
    हँस जीते या फिर बगुला
    सिक्का-उछालू खेल जारी है .

    हर एक क्षणिका काफी सुंदर !

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  6. कमाल है ...आज एकदम अलग स्वाद ...!!
    अमृता जी ...जबर्दस्त ...सभी क्षणिकायें एक से बढ़ कर एक ...!!

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  7. प्रभावशाली क्षणिकाएँ

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  8. सभी बहुत सुन्दर है पर मुझे सबसे अच्छी ये लगी.
    .गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
    क्या खूब गुदगुदाती है
    और बाँकी बर्बरता बैठकर
    मजे में चने चबाती है .

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (29-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  10. गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
    क्या खूब गुदगुदाती है
    और बाँकी बर्बरता बैठकर
    मजे में चने चबाती है .

    ....बहुत खूब! सभी क्षणिकाएं बहुत सुन्दर...

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  11. गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
    क्या खूब गुदगुदाती है
    और बाँकी बर्बरता बैठकर
    मजे में चने चबाती है.

    सभी क्षणिकाएं सुन्दर

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  12. गजब कमाल लिख मारती हैं , आप | एकदम तुरुप के इक्के माफिक |

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  13. Amrita,

    BILKUL SAHI KAHAA HAI AAPNE KI EK CHHOTI SI BAAT BHI GAJAB KAA TOOFAN KAR DETI HAI.

    Take care

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  14. बेहतरीन क्षणिकायें..गहरापन लिये..

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  15. जोरदार चपत लगा जाती है
    तिल का ताड़ बना जाती है .... !!
    सिक्का-उछालू खेल जारी है
    इन्तजार अबकी किसकी बारी है .... !!
    मजे में चने चबाती है
    इठलाती इतराती भी है ?

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  16. हर क्षणिका का रंग जोरदार .... तुरुप के इक्के की तरह

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  17. बहुत बढ़िया..............
    एक से बढ़ कर एक क्षणिकाये......
    वाह!!

    अनु

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  18. गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
    क्या खूब गुदगुदाती है
    और बाँकी बर्बरता बैठकर
    मजे में चने चबाती है .

    Behtreen ...Sateek Kshanikayen

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  19. प्रभावशाली सुंदर क्षणिकाये,,,,,

    RECENT POST,,,इन्तजार,,,

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  20. अनेक को एक ही सोंटे से

    सोंटने में ही एकता है
    जो ताखा चढ़ तूंबी बजाये
    वो ही तुरुप का पत्ता है .

    बहुत खूब है आपके शब्दों की बरजोरी

    आपका जवाब नहीं है जी.......

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  21. कोई कैसे बताये कि
    कौन किसपर भारी है
    हँस जीते या फिर बगुला
    सिक्का-उछालू खेल जारी है .

    सभी क्षणिकाएं अच्छी लगीं

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  22. चिरन्तनता बन जाएँ ये क्षणिकाएं

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  23. अलग अलग रंग से जगमगाती क्षणिकाएं.

    प्रभावशाली प्रस्तुति.

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  24. एक जरा सी शुरूआत भी
    बला की तूफ़ान ले आती है
    फिर तो हलकी सी थपकी भी
    जोरदार चपत लगा जाती है ... जबरदस्त !
    यूँ हर क्षणिकाएं कुछ कहती हैं

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  25. सभी क्षणिकाएं प्रभावशाली हैं।

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  26. बहुत सुन्दर क्षणिकाएं अमृता जी सभी एक से बढ़कर एक

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  27. एक जरा सी शुरूआत भी
    बला की तूफ़ान ले आती है
    फिर तो हलकी सी थपकी भी
    जोरदार चपत लगा जाती है .

    सचमुच, शुरुआत ही करनी है बाकी सब तो हो ही जायेगा...सशक्त लेखन...बधाई !

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  28. मुहावरों सी सुंदर और संक्षिप्त मगर गहरे अर्थों से भरी क्षणिकाएं

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  29. कोई कैसे बताये कि
    कौन किसपर भारी है
    हँस जीते या फिर बगुला
    सिक्का-उछालू खेल जारी है .
    बहुत ही बढिया ।

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  30. अनेक को एक ही सोंटे से
    सोंटने में ही एकता है
    जो ताखा चढ़ तूंबी बजाये
    वो ही तुरुप का पत्ता है .
    भाव कणिकाएं संवाद करतीं हैं सीधा सीधा ,जिसे फिट आ जाए फांसी का फंदा है बाकी सबको आज़ादी है .

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  31. गुदड़ी की गुत्थमगुत्थी भी
    क्या खूब गुदगुदाती है
    और बाँकी बर्बरता बैठकर
    मजे में चने चबाती है

    solid strong lines.. felt connected..

    Thanks

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  32. कमाल है . धमाल है . ये रंग भी बेमिसाल है .

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