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Thursday, September 29, 2011

ख़जाना

कल्पनाओं के पंख लग गये
मैं देखती रह गयी उन्हें
असीम फलक पर उड़ते हुए...
सपनों में रंग भरने लगे
मैं देखती रह गयी उन्हें
स्याह सिक्त होते हुए.......
आशाओं की कोख उजड़ गयी
मैं देखती रह गयी उन्हें
बेबस बाँझ होते हुए......
सोच को मार गया लकवा
मैं देखती रह गयी उन्हें
जब्रन जड़ होते हुए........
विचारों में युद्ध छिड़ गया
मैं देखती रह गयी उन्हें
धड़ा-धड़ धराशायी होते हुए...
मुझसे एक - एक कर
सब छुट रहे हैं या फिर
साज़िश तहत रूठ रहे हैं.....
अपने खालीपन को कैसे भरूँ
कुछ तो बहाना चाहिए
जिसमें मैं बहूँ .........
अब बिना बहाना किये
इस खालीपन के खज़ाने को
बाँटे जा रही हूँ
बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
मुआ कैसा ख़जाना है कि
खाली होने के बजाय
और भरता ही जा रहा है .

61 comments:

  1. जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .........

    वाह बहुत खूब ...पूरी कविता अर्थ लिए हुए ....मन को छू गई

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  2. बहुत अच्छी रचना है, शुक्रिया

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  3. अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है ...

    Laajawaab Rachna.. Aakhiri line to bas speechless kar diya.. Waise aapki rachnayein aksar speechless kar hi deti hain.. Aabhar...

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  4. ये पंक्तियाँ कई अर्थ देती हैं और बहुत खूबसूरत हैं. अकेलेपन और ख़ालीपन को जीती कविता.

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  5. कुछ तो बहाना चाहिए
    जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...

    बस बांटते जाइये इस खजाने को और बहाते जाइये रचनाओं की शीतल सरिता... आभार

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  6. जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है ...।

    वाह ...सुन्‍दर शब्‍दों का संगम ।

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  7. अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .
    waah behtreen rachna ......dil me sama gayi aapki ye bhavpurn rachna badhai

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  8. बेहतरीन रचना , सुन्दर प्रस्तुति ,
    आपको व आपके परिवार को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाये

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  9. बिना बहाना किये कह ही दूँ ... लाजवाब लिखा है.

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  10. खालीपन के खज़ाने ... वाह क्या कन्सेप्ट है ... बहुत सुन्दर कविता !

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  11. खालीपन का खजाना भरता जाना कह कर आपने गूढ संकेत दिया है।

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  12. वाह, बहुत सुंदर रचना।

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  13. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! हर एक शब्द लाजवाब है! शानदार प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को नवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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  14. अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .
    hai na jadu

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  15. काफी अच्छी अभिव्यक्ति ...

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  16. मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .

    भावपूर्ण अभिव्यक्ति

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  17. बहुत ही बढ़िया कविता।
    -----

    कल 30/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  18. बहुत उत्कृष्ट भावपूर्ण रचना...नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं !

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  19. पाठक-गण ही पञ्च हैं, शोभित चर्चा मंच |
    आँख-मूँद के क्यूँ गए, कर भंगुर मन-कंच |
    कर भंगुर मन-कंच, टिप्पणी करते जाओ |
    प्रस्तोता का करम, नरम नुस्खा अपनाओ |
    रविकर न्योता देत, द्वार पर सुनिए ठक-ठक |
    चलिए रचनाकार, लेखकालोचक-पाठक ||

    शुक्रवार

    चर्चा - मंच : 653

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  20. अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .....

    वाह …………विचारो को बहुत सुन्दरता से सहेजा है।

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  21. usi kajane se ye nayab moti nikala hai ...
    bahut sunder rachna ...badhai.

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  22. bahut gahan bhaav darshati hui rachna.

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  23. आपको बहुत बहुत बधाई हो सुन्दर प्रस्तुति
    MADHUR VAANI
    BINDAAS_BAATEN
    MITRA-MADHUR

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  24. कल्पनाओं से उस खजाने के सूत्र मिल जाते हैं।

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  25. जितना बांटा , उतना बढ़ता गया ...
    कारू का खजाना है ये तो !
    सुन्दर अभिव्यक्ति!

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  26. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना.....

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  27. खालीपन अनंत की परिभाषा में आता है.
    कैसे हो आपका खज़ाना खाली.

    एक और सुन्दर रचना के लिए आभार.

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  28. amrita jee bina kalpana ke bhi koi jindagee hai ,,,bus aap kalpanaoan ki esi hi udan bharte raho or hame ..apne lekhoan se sara bor karte raho .......> bhut sunder

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  29. बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें....

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  30. मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .........

    अब इन पंकतियो पर कोई क्या कहे . दिल उंढेल कर रख दिया आपने

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  31. अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है ...........

    वह क्या बात है , मुआ बस भरता ही जा रहा है ,
    और ये जीवन इसी में निकला जा रहा है .....!

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  32. बहुत खूब।
    कल्‍पनाओं की ऊंची उडान.....

    भावों का बेहतर तरीके से प्रस्‍तुतिकरण।
    शुभकामनाएं......

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  33. बहुत अच्छी रचना ........

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  34. मुझसे एक - एक कर
    सब छुट रहे हैं या फिर
    साज़िश तहत रूठ रहे हैं.....
    अपने खालीपन को कैसे भरूँ
    कुछ तो बहाना चाहिए
    जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ..... Khalipan ke khazaane kabhi khaali nahi hua karte..dil ko chhoo gayi aapki rachna. bahut khoob.

    http://neelamkahsaas.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

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  35. कविता बहुत अच्छी लगी. इसमें निम्न पंक्तियाँ कई बिंबों को उभारती हैं इस लिए ये भा गईं-
    "...कुछ तो बहाना चाहिए
    जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को...."

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  36. सर्वप्रथम नवरात्रि पर्व पर माँ आदि शक्ति नव-दुर्गा से सबकी खुशहाली की प्रार्थना करते हुए इस पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई व हार्दिक शुभकामनायें। बहुत ही मार्मिक व भावपूर्ण रचना…आपका खज़ाना प्रचुर मात्रा मे रचनाओं से भरा है…और पहली पंक्ति से लेकर अंतिम तक बांधे रखता है……

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  37. जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है ...।
    bahut sundar mam

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  38. जो हम हैं बाँट रहे
    प्यार से..सदभाव से
    वही इकट्ठा हो रहा..
    दो गुना और चौगुना होकर
    आपके खजाने में..

    बहुत अच्छी रचना है..माँ दुर्गा की कृपा आप पर बनी रहे.

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  39. bhut hi sundar abhivakti hai




    www.kavipradeeptiwari.blogspot.com

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  40. बहुत ही सुन्दर पोस्ट अमृता जी........बहुत पसंद आई |

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  41. कल्पना का खजाना अक्षुण रहे , हम मोटी चुनने को तैयार . आभार.

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  42. खालीपन को बांटना भरने के सामान हजी होता है ... लाजवाब रचना ...

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  43. Amrita,

    BAHUT DINO BAAD YEHAN AAYAA AUR 8 KAVITAAYEIN PARHI. SAB EK SE EK BARH KE HAIN. DER SE AANE KA BURRA LAG RAHA HAI.

    Take care

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  44. उत्कृष्ट भावपूर्ण रचना.

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  45. कभी खत्म न होने वाला ख़जाना।

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  46. अब बिना बहाना किये
    इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है ...

    सुंदर भाव,सुंदर गीत।

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  47. बहुत सुन्दर ||
    बहुत सार्थक पोस्ट ||
    प्रस्तुति पर बधाई ||

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  48. आपकी हर कविता को बस केवल खूबसूरत कहना कितना रिपिटीटीव लगता है...पटना जब आऊंगा तो आपसे सीखनी है मुझे ऐसी कवितायें लिखना :) :) तैयार रहना आप :)

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  49. अमृता तन्मय जी बहुत सुन्दर रचना ..हर पंक्ति सटीक और प्यारी ...सच में यही हाल है
    बधाई आप को लाजबाब ...
    धन्यवाद और आभार ..अपना स्नेह और समर्थन दीजियेगा
    भ्रमर ५
    मुझसे एक - एक कर
    सब छुट रहे हैं या फिर
    साज़िश तहत रूठ रहे हैं.....
    अपने खालीपन को कैसे भरूँ
    कुछ तो बहाना चाहिए
    जिसमें मैं बहूँ ....

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  50. वेदना की भावमयी अभिव्यक्ति .......अति सुन्दर

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  51. अद्भुत विचार और अनुभूति की कविता -उस परम संज्ञा से यही गुजारिश है कि यह अक्षय घाट कभी न रिक्त हो अन्यथा हम तो अनाथ ही हो जायेगें !

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  52. इस खालीपन के खज़ाने को
    बाँटे जा रही हूँ
    बस ...बाँटे ही जा रही हूँ...
    मुआ कैसा ख़जाना है कि
    खाली होने के बजाय
    और भरता ही जा रहा है .........

    एकदम नई approach.
    वाह, क्या कहने हैं.

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  53. बहुत बढ़िया ...... सच ऐसा ही होता है ये खजाना.....कल्पनाओं का खज़ाना

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  54. रिक्त का प्रभाव कैसा
    आग बिन अलाव कैसा

    प्रेम को झटको नहीं तुम
    भाव को अभाव कैसा

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  55. सब छुट रहे हैं या फिर
    साज़िश तहत रूठ रहे हैं.....


    अपने खालीपन को कैसे भरूँ
    कुछ तो बहाना चाहिए
    जिसमें मैं बहूँ .........
    अब बिना बहाना किये


    अद्भुत अतुलनीय

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