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Sunday, June 17, 2012

प्रेम-वरदान


माना कि हर समय
पलड़े का झुका काँटा है
और दैविक सुअवसरों ने
केवल दुःख ही दुःख बाँटा है....
पर सच देखा जाए तो
हीरे ने ही हीरे को काटा है
चाहे जितना भी खींचता हुआ
त्रासदियों का ज्वार-भाटा है....
कौन कहता है कि
जिसे तिरना नहीं आता
हर लहरों से वह हारा है
उसका भी क्षिति से क्षितिज तक
क्षण प्रति क्षण का सहारा है....
अनुक्त अनुभूतियों का भी
विस्तृत विसदृश्य किनारा है..
जिसने अतल गहराइयों से भी
हर बार , हर बार उबारा है.......
ये भी माना कि
जिसे जीवन की नदी में
अपना द्वीप बनाना नहीं आता...
गंभीर ग्रीष्म को देखकर भी
मेघ बन उफन जाना नहीं आता...
और सूर्य की दीप्त किरण से
विमल हो मिल जाना नहीं आता....
पर वे भी एक
अकल्प अद्भुत संयोग ही हैं
विषम व्यवधान हेतु
एक विलक्ष वियोग ही हैं......
किन्तु ये तो बस समय की बात है
जिसमें संभवत: नियति के
खलनायक का भी बड़ा हाथ है.....
ह्रदय तो बस
ह्रदय की भाषा जानता है..
काल-दूरी से परे जाकर
बस धड़कनों को पहचानता है....
कहीं से तनिक भी
पाकर अनमोल प्रेम-वरदान
निर्मल सरोवर सा
बन जाता है हर सूखा प्राण....
जी उठती है जिसमें असीमित धार
छोड़ सारे अहम् व वहम को
कर ही लेता है वो
अभिनव,अभिभूत,अपरिमित प्यार .

44 comments:

  1. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  2. बहुत सुन्दर.....................

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  3. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है...
    वाह कितना सुन्दर भाव ...
    काश यह मात्र कवि सत्य न हो ,वास्तविक भी हो ! :)

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  4. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..

    और फिर शायद यही अंतिम सत्य है

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  5. Amrita,

    YEH SACH HAI KI PREM SE JEEVAN KHUSHION SE BHAR JAATAA HAI.

    Take care

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  6. प्रेम का वरदान जिसे मिल गया वह तो समझो मझधार से तर गया।

    (कविता समाप्त होने के बाद जो खाली स्थान शेष रह गया है उसे मिटा दें।)

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  7. इतनी गहरी बातें आपने अपनी रचना में पिरोई है कि कम से कम चार तो पढ़नी ही पड़ी तब जाकर बातों के मर्म से आमना सामना हुआ .
    क्या कहूँ कभी सोचता हूँ इस बार तो कहीं कमी मिलेगी लिख दूंगा नहीं भाया ,लेकिन हर बार अफसोस ,इस बार भी ,.....
    जीवन कि बारीकी लिए .......

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  8. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....

    यही सत्य है,,,,,,,,,

    RECENT POST ,,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

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  9. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....

    सच है ....बहुत सुंदर रचना

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  10. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....
    कहीं से तनिक भी
    पाकर अनpaमोल प्रेम-वरदान
    निर्मल सरोवर सा
    बन जाता है हर सूखा प्राण....gahan chintan...bejod shabdabali..alankarik rachna..uddhrit panktiyan to man ko choo gayeein..sadar badhayee ke sath

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  11. कोई है, मन सहलाता जो..

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  12. सचमुच प्रेम प्रकृति का अनमोल वरदान है, निर्मल सरोवर सा सुन्दर पावन... बहुत सुंदर रचना

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  13. जी उठती है जिसमें असीमित धार
    छोड़ सारे अहम् व वहम को
    कर ही लेता है वो
    अभिनव,अभिभूत,अपरिमित प्यार
    अभिनव,अभिभूत,अपरिमित और अद्धभुत प्यार दिखा आपकी रचना में

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  14. अद्भुत रचना .... गहन विचार ....

    और दैविक सुअवसरों ने
    केवल दुःख ही दुःख बाँटा है....
    पर सच देखा जाए तो
    हीरे ने ही हीरे को काटा है ।

    सुख की भी अनुभूति तो हुयी होगी तभी न दुख का एहसास है ....
    अहम न हो तो बस प्रेम ही प्रेम है ...

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  15. प्रेम की उत्तम व्याख्या ...

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  16. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है.
    अमृता जी ,ह्रदय के भावों का इतना चित्रमय वर्णन मैंने नहीं पदा था.मै इनदिनों अमेरिका के प्रवास पर हूँ.कलिफोर्निया के एक शहर सनीवेल में जंहाँ भारतीया बहुल हैं वंही की एक संस्था में हिंदी कवी सम्मलेन होने जा रहा है .इसमें ही मुझे भी शिरकत करनी है.चुकी कल्ह ही है और मै आपसे पर्मिसिन भी नहीं ले सकता हूँ ,किन्तु आपको सूचित कर रहा हूँ की आपकी यह कविता का पाठ वंहा करने जा रहा हूँ.मै अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ ,क्षमा कीजियेगा.

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    प्रेम जीवन की अनुपम अनुभूति, प्रेम किया तिनहि प्रभु पायो। बेहतरीन रचना

    केरा तबहिं न चेतिआ,
    जब ढिंग लागी बेर



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ संडे सन्नाट, खबरें झन्नाट♥


    ♥ शुभकामनाएं ♥
    ब्लॉ.ललित शर्मा
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  18. कौन तुम जो क्षण प्रतिक्षण
    कर रहे हो सृष्टि रक्षण
    गूढ जितने, हो सरल मन.....


    सादर

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  19. छोड़ सारे अहम् व वहम को
    कर ही लेता है वो
    अभिनव,अभिभूत,अपरिमित प्यार .

    गहन अभिव्यक्ति ...सुंदर मार्गदर्शन ....अद्भुत रचना अमृता जी ....

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  20. 'किन्तु ये तो बस समय की बात है
    जिसमें संभवत: नियति के
    खलनायक का भी बड़ा हाथ है.....
    ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....'
    - कविता है या अनुभूति के स्वर्णिम कणों की सुन्दर लड़ी !

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  21. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....
    बेशक !

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  22. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....
    कहीं से तनिक भी
    पाकर अनमोल प्रेम-वरदान
    निर्मल सरोवर सा
    बन जाता है हर सूखा प्राण..

    एक ह्रदय जब दूसरे ह्रदय की बात समझ लेता है , पहचानता है , तो भीतर सूखा सा फिर हरा हो जाता है ...
    बेहतरीन , अमृता जी !

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  23. प्रेम तो बस प्रेम होता है, उसको बहुत खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है आपने....
    पापा, आपसे माफ़ी मांगता ही रहूँगा......

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  24. सच देखा जाए तो
    हीरे ने ही हीरे को काटा है
    चाहे जितना भी खींचता हुआ
    त्रासदियों का ज्वार-भाटा है....तो किसी दर्द को दर्द का मारा ही जान सकता है और बाँट सकता है

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  25. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..बहुत सुन्दर...

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  26. अद्भुत रचना अमृता जी .

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  27. भावों की विलक्षणता और शब्दों की चतुरंगिनी . वरदान सदृश है सब कुछ .

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  28. कौन कहता है कि
    जिसे तिरना नहीं आता
    हर लहरों से वह हारा है ...

    बहुत खूब ... सच है हार तो मन से है ... मानने पे है ... गहरे भाव ...

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  29. सचमुच दिल से दिल की बात हो जाती है और किसी को कानों कान खबर भी नहीं होती...बहुत सुंदर भाव और शब्दों का प्रवाह तो बेजोड़ है...अमृता जी !

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  30. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (19-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  31. जी उठती है जिसमें असीमित धार
    छोड़ सारे अहम् व वहम को
    कर ही लेता है वो
    अभिनव,अभिभूत,अपरिमित प्यार .

    प्यार की शक्ति है ही अपरिमित. सुंदर भाव लिये एक लाजवाब कविता.

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  32. कहीं से तनिक भी
    पाकर अनमोल प्रेम-वरदान
    निर्मल सरोवर सा
    बन जाता है हर सूखा प्राण....sacchi bat...

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  33. जहॉ प्रेम नहीं, वहॉं शाति नहीं हो सकती। जहॉं पवित्रता नही, वहॉं प्रेम नहीं हो सकता। जब जीवन में हर परिस्थिति का सामना करना ही है तो प्रेम से सामना क्‍यों न करें? दु:खों से भरी इस दुनिया में सच्‍चे प्रेम की एक बूंद भी मरूस्‍थल में सागर की तरह है। इसलिए अगर यह मिल जाए, तो वरदान ही है।

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  34. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  35. छोड़ सारे अहम् व वहम को
    कर ही लेता है वो
    अभिनव,अभिभूत,अपरिमित प्यार .

    बहुत ही सुन्दर और सशक्त पोस्ट।

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  36. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    बहुत सुंदर रचना ...

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  37. कुछ दिल ने कहा............

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  38. कहीं से तनिक भी
    पाकर अनमोल प्रेम-वरदान
    निर्मल सरोवर सा
    बन जाता है हर सूखा प्राण....

    ....सच्चा प्रेम एक अपरिमित वरदान है जो जीवन की दिशा बदल देता है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  39. Waaahhhh...beautiful....
    totally awesome kavita hai di:) :)

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  40. आदरणीय अमृता तन्मय जी,
    आपको सहर्ष सूचित कर रहा हूँ की आपकी कविता "प्रेम वरदान ''यंहां सनीवेल ,कलिफोर्निया ,में प्रवासी भारतीया हिंदी सम्मलेन में मेरे द्वारा प्रस्तुत की गयी.इस कविता की यंहां के लोकल पपेरों में भी छपी .आल अमेरिका प्रवासी हिंदी सम्मलेन जो यंहां नुयार्क में ४ जुलाई को होने जा रही है ,उसमे प्रस्तुत करने के लिए भी चुनी गयी है.आप अगर अपना पता या कोई लिंक हो तो मुझे भेज दे या सनीवेल में सीधे ही भेज दे.आपका मेरे पास न इ मेल है और न ही पोस्टल एड्रेस .सिर्फ बिहार पटना ही लिखा हुआ है.इसलिए कोमेंट बॉक्स में लिख रहा हूँ.यंहां सेमात्र यही एक कविता सर्वसम्मति से चुनी गयी.आपको बधाई

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  41. किन्तु ये तो बस समय की बात है
    जिसमें संभवत: नियति के
    खलनायक का भी बड़ा हाथ है.....





    सचमुच

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  42. अनुक्त अनुभूतियों का भी
    विस्तृत विसदृश्य किनारा है.
    जिसने अतल गहराइयों से भी
    हर बार, हर बार उबारा है...

    बहुत सुंदर कविता.

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  43. ह्रदय तो बस
    ह्रदय की भाषा जानता है..
    काल-दूरी से परे जाकर
    बस धड़कनों को पहचानता है....

    सच कहा आपने.
    पहचानने के लिए बस हृदय होना चाहिये हमारे पास.

    वरना हृदय का दुभाषिया भी तो कोई नही है.

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