Saturday, May 30, 2020

मुझे निमित्त बना कर........

उन सारे सामान्य शब्दों से
एक असामान्य -सी , कविता कहना है 
उन्हीं साधारण -से शब्दों के जोड़ से
असाधारण से भी कुछ ज्यादा गहना है......

जैसे प्रेम से छुआ कोई स्पर्श
स्वयं ही आतुरता को कह जाए
जैसे श्वास के सहारे
कोई हृदय तक उतर आए.......

जैसे बंद आँखों से ही
वो अनदेखा दिख जाता है
जैसे मौनावलंबन भी
कुछ अनकहा कह जाता है.......

जैसे गहन अंधकार के बीच
एक बिजली कौंध जाती है 
जैसे बादलों को परे हटाकर
चाँदनी बाँहे फैला कर मुस्काती है ......

जैसे वीणा के तार पर मीठा छुअन
ध्वनियों के पार हो जाता है
जैसे नृत्य में नर्तक एकमेक हो
तन्मय हो जाता है.....

जैसे चित्रफलक पर
रंगों और कूचियों का मिलना
जैसे अनगढ़ पत्थरों को पूजने के लिए
प्राण भर- भरकर गढ़ना ......

जैसे कोई अद्भुत रहस्य
अनायास ही उद्घाटित हो जाता है
जैसे खुली मुट्ठी में भी
अनंत ऐश्वर्य भर आता है.....

जैसे व्यक्त होकर भी 
वो अव्यक्त रह जाता है
जैसे मुझे निमित्त बना कर
स्वयं कविता कह जाता है .....

निस्संदेह मेरे कहने में
कहने से भी कुछ ज्यादा है
पर जो कहा न जा सका
वो और भी बहुत ज्यादा है .





8 comments:

  1. "जैसे वीणा के तार पर मीठा छुअन
    ध्वनियों के पार हो जाता है"
    अव्यक्त की अभिव्यक्ति का यह सौंदर्य रहस्यमय है.

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  2. एक लम्बे अन्तराल पर सृजित सुन्दर कविता।

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  3. जो कहा न जा सके वही असाधारण है जो साधारण शब्दों में नहीं समाता, पर जिसका है हर शब्द से गहरा नाता

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  4. खुली मुट्ठी में अनंत का भाव ...
    आपने शब्दों से सुन्दर गागर भरी नही आज ... लम्बे अंतराल के बाद ... स्वागत है आपका ...

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  5. आपकी सोच और शैली दोनों को नमन ...

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  6. अनापेक्षित जीवन अनुभवों, जिनमें निश्चित रूप में प्रेम सर्वश्रेष्ठ है, का पद्य-भाषागत सौंदर्य की विविध उपमाओं से किया गया यह कविताई श्रृंगार अपने आकर्षण से बींध रहा है, छलनी कर रहा है।

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  7. बहुत ही सुंदर रचना ,लाजवाब हर बात

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  8. ह्रदय से स्पर्शित जो भाव हैं, उसका स्फुरण स्वाभाविक है।
    जो कहा ना जा सका। ...उसी का बेसब्री से इंतजार है.

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