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Sunday, January 16, 2011

दावा

जितनी रहस्यमयी है
घर से बाहर की दुनिया
उससे कहीं ज्यादा
रहस्यमय है -ये घर
ऐसा भूलभुलैया
जिसका सबकुछ
कहीं खो गया है...
इसके नक़्शे में तो
सात सौ खिड़की और
नौ सौ दरवाजों का जिक्र है....
मानो समय
पृथ्वी के गर्भ में
छोड़ गया हो
साँस के साथ जनमती आशा 
उसी के साथ मरती भी ....
देह की झुर्रियां गवाही देती
और भी रहस्यमयी ...
घर का कोना -कोना
एक अनसुलझी पहेली
जिसे सुलझाते-सुलझाते ...
उलझती मैं........
वो सुई भी खोई है
इसी घर में
जिससे मैं कभी
सिया करती थी
समय के टुकड़ों को...
अधूरी पड़ी मेरी चादर
थोड़ी ढकी मैं
थोड़ी उघडी...
घर की तरह ही -
रहस्यमयी.......
दावा करती हुई 
कि--------मैं हूँ .

33 comments:

  1. रहस्यात्मक भावबोध से परिपूर्ण इस कविता में जीवन के विविध पहलुओं को रेखांकित करने का प्रयास किया है आपने ..बहुत अनूठे अंदाज में ....सतही तौर पर तो कविता इस अर्थ को संप्रेषित नहीं करती ..थोडा गहरे में उतर कर अर्थ बोध हो जाता है ....आपका आभार इस प्रस्तुति के लिए

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  2. जीवन बोध कराती रचना
    सुन्दर बिम्बो के माध्यम से आपने सुन्दर भाव पिरोया है.

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  3. जीवन बोध कराती रचना ...आभार इस प्रस्तुति के लिए

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  4. bahut khoob amrita ji..............ghazab ki rachan.

    bahut bahut badhaai is rachna ke liye.

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  5. अमृता जी,

    वाह...वाह....सुभानाल्लाह......बहुत ही खूबसूरत.....इस बार आपने कुछ सरल शब्दों का इस्तेमाल किया है.....

    मेरी नज़र में ये एक बेहतरीन नज़्म है......सात सौ खिड़कियाँ और नौ सौ दरवाज़े......वाह अमृता जी.....दाद कबूल करें|

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  6. "साँस के साथ जनमती आशा
    उसी के साथ मरती भी ....
    देह की झुर्रियां गवाही देती...."

    जीवन की कई परतों को उधेड़ती अदभुत रचना
    बहुत बधाई
    आभार

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  7. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना आज मंगलवार 18 -01 -2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/2011/01/402.html

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  8. बहुत सुंदर .... जीवन दर्शन को प्रस्तुत करती बानगी.....

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  9. ज़िन्दगी के सच को सुन्दर बिम्बो के माध्यम से जिस तरह कहा है वो काबिल-ए-तारीफ़ है ……………यही तो हकीकत है।

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  10. बेहतरीन अभिव्यक्ति!

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  11. जीवन एक रहस्य है इस सत्य को बखूबी दर्शाती हुई एक सुंदर रचना !

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  12. रचना में मनोभावों का सुन्दर विश्लेषण किया है आपने!

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  13. जीवन दर्शन से लबरेज़
    बहुत सुन्दर कविता..

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  14. यहाँ आना निःसंदेह सुखद रहा
    सुन्दर कविताएँ हैं आपकी.

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  15. वो सुई भी खोई है
    इसी घर में
    जिस से में सिया करती थी
    समय के टुकड़ों को

    खूबसूरत भाव और बिम्ब हैं आपकी कविता में !

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  16. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, सुंदर भावपूर्ण कविता.

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  17. अति सुंदर....भावपूर्ण....बधाई !!

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  18. दावा तो वाकई रहस्यमय ही है ...सुन्दर अभिव्यक्ति .

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  19. बड़ी सुखद सी असमंजस की सी स्थिति का बोध कराती कविता.
    बहुत अच्छा ....

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  20. bahut sunder rachna.mere blog par ane ka shukriya..

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  21. जीवन दर्शन की सफल अभिव्यक्ति। इस कविता में सबसे अच्छी बात
    यह लगी कि जीवन जैसा है वैसा ही रहने दिया गया है। किसी चमत्कार से अलंकृत नहीं।

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  22. शशक्त अभिव्यक्ति सुई की तलाश तो हम सब को है.चादरें सभी उधडी पडी हैं.कमबख्त सुई नहीं मिलती.सुन्दर रचना के लिए आप की कलम को सलाम

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  23. very well put. also thanks for your kind comments on mushayara

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  24. ब्लॉग मै आने का शुक्रिया !

    बीते लम्हों को खूबसूरती से दर्शाती सुन्दर रचना !

    बधाई दोस्त !

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  25. Thankyou Amrita ji , aap bahut achchha likhti hai ...abhi abhi aapki bahut sari rachnayen padhee, lagta hai ham apni antryatra par nikle hain ..
    Sharda Arora

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  26. बहुत ही गहराई से आपने अपनी बात कही है.

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

    सादर

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  27. आपने तो बिम्बों का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया है....
    यहां तक लाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया...
    बहुत उम्दा रचना....बधाई
    आगे भी आऊंगी...जरूर

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  28. kya baat hai dost bahut khoob
    ghar ki tarah hi
    rahasyamayi
    dava karti hui
    ki........main hu.

    sach main bahut hi deeply touch kiya

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  29. वाह! क्या प्रस्तुति है। घर में इतनी गहरी पैठ, बहुत खूब।

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  30. Samay ki suyi kho hgayi hai.....jinse sila jaata tha samay ke tukron ko....

    bahut behtareen hai aapki rachna...samay ki suyi ka khona 2 baton ka dyotak ho jata hai...ek to jis se aap samay ke tukron ko silte hain aur ek shayad us suyi ka khona jo khud samay ko ingit karti hai....

    Bimbon ka prayog bahut acche dhang se kiya gaya hai....swayam par kiya gaya har prayog mujhe har dard se nizaat dilata hai...shayad aap bhi meri tarah hi hain....ya shayad mujhse kahin adhik behtareen...khush hun aapki iss sampoorn vidha par aur is baat se bhi ki mujhe aapko padhne ka mauka mila..Dhanyavaad.

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