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Sunday, April 29, 2018

स्वार्थ ........

मेरे लिए मेरी हर रात महाभिनिष्क्रमण है
और मेरा हर दिन महापरिनिर्वाण है
स्वअर्थ में अपना दीप मैं स्वयं हूँ
बस इतना ही ध्यान है , इतना ही भान है ...

जहाँ सस्ती से सस्ती बोली में बिकती स्वतंत्रता है
चारों ओर एक गहन संघर्ष है , खींचातानी है
वहाँ जीवन में स्वयं का बड़ा भाव भी बड़ा न्यून है
और परतंत्रता में ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है ....

कल तक उधार में जो मैंने लिया था
वो बहुत ही सुंदर शब्दों का भरा- पूरा संसार है
पर अब हर क्षण अपने ही स्वार्थ में ही सधना
मेरे मौलिक होने का मूल आधार है ...

दूसरों को कारण बना स्वयं विचलित होना
अब मेरे लिए अहितकारी है , अशुभ है
आत्मानुभूति और आत्माभिमान के आलोक में रहना
परम दुष्कर तो है पर मेरे लिए शुभ है ....

केवल अपने अर्थ की महत्ता को समझकर ही
सहज रूप से स्वयं के सत्य को पाना है
उसी स्वार्थ में ही तो परार्थ का प्रज्वलित दीप है
अपना दीप स्वयं होकर ही मैंने जाना है .


*** अपना अर्थ स्वयं पाना है ***
*** अपना दीप स्वयं जलाना है ***
*** अपना बुद्ध स्वयं जगाना है ***
      *** शुभकामनाएँ ***

11 comments:

  1. बहुत ही सुंदर भाव. बुद्धमयी रचना.
    "दूसरों को कारण बना स्वयं विचलित होना
    अब मेरे लिए अहितकारी है, अशुभ है
    ...अपना बुद्ध स्वयं जगाना है"
    और कुछ कहने को बचता नहीं सिर्फ यह जहाँ कविता पहुँचती है वहाँ चुप्पी से भी अधिक बहुत कुछ है.

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  2. बुद्ध पूर्णिमा पर इससे सुंदर उपहार कोई क्या दे सकता है स्वयं को और दूसरों को ..बहुत बहुत बधाई इस अनमोल उपलब्धि के लिए..जिसको उपलब्धि कहना भी बहुत छोटा है..यह तो कृपा है अस्तित्त्व की..

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  3. ,एक बडा होता बृक्ष । आकांछा दिग दिगंत तक विस्तार ।नीचे छाया नही । और ऊपर कहीं आकासकुसुम।

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01.05.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2957 में दिया जाएगा

    हार्दिक धन्यवाद

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  5. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 02 मई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  6. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 02 मई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  7. बहुत लाजवाब...
    वाह!!!

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  8. *** अपना अर्थ स्वयं पाना है ***
    *** अपना दीप स्वयं जलाना है ***
    *** अपना बुद्ध स्वयं जगाना है ***

    अपने महाभिनिष्क्रमण को निर्वाण खुद देना है

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  9. * अपना अर्थ स्वयं पाना है ***
    *** अपना दीप स्वयं जलाना है ***
    *** अपना बुद्ध स्वयं जगाना है ***
    बौद्धिकता नहीं बुद्धत्व से प्रेरित रचना | सचमुच ये अपने भीतर से ही जगाना होता है | शुभकामना --

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  10. बहुत सुन्दर रचना।.........
    मेरे ब्लाॅग पर आपका स्वागत है ।

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