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Friday, March 11, 2016

हरफ़ों में ........

बहुत दफ़न हैं हरफ़ों में , हम भी हो जायेंगे
उन बहुतों के बीच , कभी-कभी दिख भी जायेंगे

कुछ हरफ़ उठा वे लेंगे तो कुछ हरफ़ पकड़ लाएंगे
कुछ हरफ़ खुद आएंगे तो वे कुछ हरफ़ ले आएंगे

यक़ीनन हरफ़-हरफ़ हम न कभी पढ़े जाएंगे
व उनके हरफ़ों से ही हरफ़-बहरफ़ गढ़े जायेंगे

अगरचे ये हमाक़त ही तो हमारी जिंदगी है
गोया हरफ़ों के बंदीखाने में अक़दस बंदगी है

बखत की बंदिशें हैं और ये ख़यालात बेमिजाज़ी है
आज और अभी हरफ़ों की जीती हुई हर बाजी है

दफ़न हो जाएंगे हम पर ये हरफ़ ख़ाक न होंगे
अजी !शोला-ये-शौक है ये जो कभी शाक न होंगे . 

8 comments:

  1. बखत की बंदिशें हैं और ये ख़यालात बेमिजाज़ी है
    आज और अभी हरफ़ों की जीती हुई हर बाजी है

    ख़ूब ख़ूब ख़ूब .... वाह

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    1. हर्फ़े हैं की परछाइयाँ , जिंदगी को तरह पीछा छूटेगी नहीं

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  2. बहुत सुन्दर ...

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  3. इन हर्फों के हजूम में खो जाना ज्यादा बेहतर है बजाये खो जाने के ... मस्त है ग़ज़ल ...

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  4. बेशक हम सब अस्त हो जाएंगे, पर हरफ तो अपनी गवाही देगा और जिंदादिली का सबूत भी. इन हरफों के पास आपके अलावा है भी क्या। ये जाएँ भी तो कहाँ जाएँ ?

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  5. जब हम ही नहीं रहेगे 'तो रहेगी क्या मज़ार हमारी ।
    Seetamni. blogspot. in

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  6. इसे पढ़ कर आपकी एक कविता की याद हो आई. जिसका उन्वान ही शायद यह था-
    "और मैं पढ़ ली जाऊँगी".

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  7. बहुत शानदार , जिंदगी भी तो हर्फों की हो पटछाइयां हैं।

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