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Friday, December 16, 2011

मिट्टी की सेज

नहीं चाहा कभी
मिट्टी की सेज पर बिछना
और मिट्टी हो जाना
बस गंधी से कुछ गंध
उधार लेकर
भर दिया कल्पनाओं में
कर दिया हवा के हवाले
नहीं पता था कि
पंख समेट कर हवा भी
चल देगी अपने रस्ते
मिट्टी पर गिरकर वो
गंध जायेगी उसी गंध में....
वही भभका देगा
फूल बनने के स्वांग को और
कन्नी काटकर निकल लेंगे
भंवरे , तितलियाँ ....
बैठकखाने के सजावट को भी
खिल्ली उड़ाने का
मिलेगा मौका भरपूर...
नहीं पता था कि
मिट्टी में गड़कर
मरना होता है , सड़ना होता है
फूटती हैं तब कोंपले
चाहतों का क्या
बस चाहना काम है...
अभी भी बस
भनक ही लगी है कानों को
पता चलते - चलते
पतझड़ में तो
जरुर मिलना होगा उससे..
अभी दिख रहा है
भागता हुआ बसंत
पतझड़ के पीछे...
कल्पनाओं में ही खिले रहे
अमरबेलों पर फूल
न मुरझाने वाला
गंधी को उधार लौटाने का
जी नहीं कर रहा है ... 
हाँ , नहीं बिछना चाहती हूँ
मिट्टी की सेज पर
नहीं होना चाहती हूँ मिट्टी
खुद से जो प्यार हो गया है .

 

49 comments:

  1. बहुत रह लिये,
    बीज बने थे,
    मिट्टी भीतर,
    अब खिलना है,
    फूलों जैसे।

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  2. nahin hona chahti mitti
    khud se pyaar ...... bahut gambheer ehsaas

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  3. अभी बस भनक ही लगी है कानो को
    पता चलते चलते
    पतझड़ में तो जरुर मिलना होगा उससे ...
    शानदार रचना के लिए बधाई

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  4. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति...

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  5. जीवन के शास्वत सत्य की गहन और सुंदर अभिव्यक्ति..

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  6. माटी में मिल के माटी.... अंजाम ये के माटी :(

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  7. हाँ, नहीं बिछना चाहती हूँ...
    ... खुद से जो प्यार हो गया है।

    बहुत मजबूत है कथन आपका

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  8. प्यार के महत्व को समझने और जीने के लिए खुद से प्यार करना बहुत जरुरी है ..बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना. शुभकामनाएं!!

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  9. मिट्टी के खिलौने में प्राण क्या फूंक दिया तूने, वह मिट्टी से ही भागने लगा! हे ईश्वर! तू भी कमाल करता है।

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  10. खुद से प्यार होना तो बहुत ही बड़ी बात है जी.
    आपकी सुन्दर तन्मय प्रस्तुति के लिए आभार,अमृता जी.

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  11. tamam bhavon se labrej panktiyan...

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  12. कल १७-१२-२०११ को आपकी कोई पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  13. वाह, कमाल की पंक्तियाँ हैं !
    आभार !!!!

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  14. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  15. इतनी खुबसूरत पंक्तियाँ हैं की बस खामोश रहके तारीफ़ की जाए तो बेहतर होगा. बस इतना ही कहूँगा खुद से प्यार की बात बहुत निराली है.

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  16. बेहतरीन रचना, सुंदर अभिव्यक्ति !

    आभार !!

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  17. पंख समेट कर हवा भी
    चल देगी अपने रास्ते
    वाह, एक समातन सत्य को सुंदर तरीके से अभिव्यक्त किया है. स्वयं से जब प्रेम हो जाता है तो व्यक्ति शब्द हो जाता है और शब्द को मिट्टी और गंध से मोह या भय नहीं रह जाता. आपकी यह रचना यह कह रही है. बहुत सुंदर.

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  18. अभी खिल रहे हैं कल्पनाओं की अमरबेलो पर फ़ूल, नहीं होना है अभी मिट्टी... बहुत सुंदर अहसास... आभार

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  19. सुभानाल्लाह..........मिटटी की सेज और मिट कर फिर बन जाना और फैलती खुशबू........क्या बात है बहुत खूब|

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  20. वाह ...बहुत खूब ।

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  21. Wah!!! Bahut Sundar....


    www.poeticprakash.com

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  22. सुन्दर प्रेरक प्रस्तुति....!

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  23. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

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  24. शाश्वत की गहनाभिव्यक्ति....
    सादर...

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  25. बेहद गहन भावो का समन्वय्।

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  26. जीवन में रागात्मकता बनी रहे ..जीवन का स्पंदन है ....यह रचनाधर्मिता बनी रहे ....कविता तो कल ही पढ़ डाली थी टिप्पणी आज ....

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  27. बहुत गहन अभिव्यक्ति!!

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  28. सुंदर कविता अमृता जी बधाई और शुभकामनाएं |

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  29. वाह ....बेहतरीन और अर्थपूर्ण पंक्तियाँ

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  30. मधुर संयोजन......
    सुन्दर रचना.....

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  31. नामुमकिन सी एक रात में

    अपने को जी लो तुम...

    खुद को एक पल नवाज दो...

    निर्मम वक़्त की चाक पर

    मिट्टी सी अधूरी हसरतें

    बार-बार टूटती बिखरती है

    सदी तो लौट कर चली आती है

    पर.. नामुमकिन सी रात का वो पल....

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  32. बहुत सुंदर अहसास और प्रस्तुति.

    बधाई.

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  33. बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण रचना! बहुत बढ़िया लगा!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  34. आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपका इंतजार रहेगा ।

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  35. bahut sundar, bhavpoorn rachana,badhai.

    bahut dinon se aapaka mere blog par aagaman naheen huaa, padhaaren,swagat hai.

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  36. जीवन चक्र में बने रहने के लिए खुद से प्यार ....बहुत सुन्दर

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  37. कल्पना शक्ति को सलाम

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  38. कल्पना शक्ति को नमन।

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  39. खुद से प्यार होना यानी जीवन का सफल होना।
    बढि़या कविता।

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  40. Amrita,

    TEEN KAVITAYEN PARHI. PIYA SE BICHHURNE KAA VARNAN HRIDEY KO CHHOONE WAALAA HAI. IS KAVITA MEIN BHI GURH BAAT KAH DI HAI AAPNE.

    Take care

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  41. आपके पोस्ट पर आना सार्थक हुआ । बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट "उपेंद्र नाथ अश्क" पर आपकी सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है । धन्यवाद ।

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  42. इंसान होने के लिए खुद से प्यार होना जरूरी है।

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