Pages

Friday, November 25, 2011

म्यान

अपनी तरफ से मैंने
कभी कोई पहल नहीं किया
उसने किया भी तो , मैं
अनजान बन गयी
उसी के साथ म्यान में हूँ
अनजाने , अनचीन्हे रिश्ते लिए
और हमेशा बीच में देती रही
अनबन को ज्यादा जगह....
हालाँकि कोई घोषित दुश्मनी
या कोई धर्मयुद्ध है
ऐसा भी नहीं पर हरवक्त
होती रहती है तलवारबाजी...
सम्मानजनित सामंजस्य
सभ्य सुरक्षित वार
घाव भी ऐसे देना कि
प्रतिरक्षण प्रणाली
आप ही कर ले दुरुस्त....
कोई शर्त या बाध्यता नहीं
रण में डटे रहने की
संवेदनशील भावहीनता
भाषा जनित संवादहीनता
संकेतो या तरंगों के बीच भी
अनजाना अर्थहीनता ....
बस पुतलियाँ बड़ी-बड़ी कर
एक-दूसरे को घूरना
उबन कम करने के लिए
उबासियाँ ले ले कर
थपकियाँ दे दे कर
एक-दूसरे को जगाते रहना...
या फिर मुँह फेरकर
अनजाने रिश्ते में
थोड़ी और खटास घोलना ...
मुझपर हावी है वो और
भारी भी पर , मैं भी
कुछ कम तो नहीं..
ये म्यान मेरा है
उसकी अपनी मजबूरियां है
तो फिर वायदा - कायदा को
तोड़-ताड़ करने में
कुछ जाता भी नहीं है
ज्यादा चिढेगा वो , भागेगा
और इस खोखले म्यान को तो
खाक होना ही है
फिर बांचने वाले बांचते रहेंगे
खोखले म्यान की
खोखली महिमा .
 

42 comments:

  1. प्रेम गली अति संकरी तामे दो न समाहीं ...!

    ReplyDelete
  2. इस खोखले म्यान को तो
    खाक होना ही है
    फिर बांचने वाले बांचते रहेंगे
    खोखले म्यान की
    खोखली महिमा ...shaandaar

    ReplyDelete
  3. इस खोखले म्यान को तो खाक होना ही है....

    शायद आज की ज़िंदगी का यही सच है... बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  4. waah Amrita ji waah, kitni sukshmata se dekh payi hain aap rishton ke beech se nikal akar ekdam alag khade hokar jaise dekha ho.

    "sabhya surakshit vaar"
    "bhasha janit samvadheenata "..."sanketon ya tarangon ke beech bhi...anjaana arth heenata"
    kuchh alag hi baat hai.

    ReplyDelete
  5. अमृता जी आजकल तो आप गज़ब कर रही हैं......सुन्दर बिम्बों से शानदार और बेहतरीन पोस्ट.......चौथी बार लगातार हैट्स ऑफ|

    ReplyDelete
  6. गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने जो सराहनीय है!

    ReplyDelete
  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

    ReplyDelete
  8. ये म्यान मेरा है
    उसकी अपनी मजबूरियां हैं

    वाह...बेजोड़ रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

    ReplyDelete
  9. आक्रोश को मर्यादा की म्यान में छिपा कर रखना सीख गये हैं हम।

    ReplyDelete
  10. प्यार में कभी कभी ऐसा भी होता है.... :)

    ReplyDelete
  11. रिश्तो का खोखलापन ....ना जाने क्यूँ...जिन्दगी भर ढ़ोने को मजबूर करता है

    ReplyDelete
  12. गंभीर बिम्बों को लेकर सार्थक चर्चा...
    सादर....

    ReplyDelete
  13. खोखले म्यान की
    खोखली महिमा.

    अमृता जी,आपका बयां निराला है जी ?
    म्यान की बात से कुछ और भी प्रेषित कर रहीं हैं आप.
    सकारात्मकता ही हर बात का जबाब है.
    मुझे तो यह गाना बहुत पसंद है
    'नफरत करने वालों के सीने में प्यार भर दूं....'

    ReplyDelete
  14. Saath saath paraspar virodhi shabdo ko rakh k bhi aise goonth dia h maano ek hi daali pe khile the ye phool kabhi.. bahut khoob :)

    ReplyDelete
  15. ज़िंदगी का सच... भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  16. बेहद गहन अभिव्यक्ति जीवन के सत्यो को उजागर करती हुई।

    ReplyDelete
  17. जीवन का सास्वत सत्य उतार दिया है दिया है रचना मैं बधाई

    ReplyDelete
  18. अधिकार और सहभागिता है तो परस्पर है, अन्यथा नहीं है. केवल खाली म्यान है खोखली महिमा वाली. बदलते समय के बदलते मिजाज़ की सुंदर कविता.

    ReplyDelete
  19. खोखले म्यान की खोखली महिमा से पार उतर कर ही सामंजस्य की बात मूर्त हो सकती है!
    सुन्दर शब्द प्रयोग !

    ReplyDelete
  20. सहज भी.. सलज भी..

    घाव भी ऐसे देना कि... बहुत ही सुन्दर .......................

    राहुल

    ReplyDelete
  21. म्‍यान का बिम्‍ब बहुत सुंदर है। कविता के भाव भी।
    *
    दो बातें पहल और म्‍यान दोनों ही स्‍त्रीलिंग शब्‍द हैं।

    ReplyDelete
  22. Behad gambheer aur arthpoon abhivyakti. Ek aise rishte ka khokhalapan dikhati jise aksar mahimamandit kiya jata hai chahe dharatal par uski vastavikata kitni hi thothi ho.
    Is sargarbhit aur pur-asar rachna k liye saadhuvad!

    ReplyDelete
  23. sunder shabdo ka sunder samavay ............badhai

    ReplyDelete
  24. Kabhi koi majboori .. Kabhi koi chahat Mayan mein rahne ko vivash karti hai ... Yahi to jeevan hai ..

    ReplyDelete
  25. म्यान का प्रयोग और सामंजस्य का प्रश्न ..... सार्थक रचना

    ReplyDelete
  26. अमृता जी,
    बहुत ही खूबसूरत बिम्ब.
    सार्थक सृजन.

    तुम तलवारों की बात करते हो,
    हमें म्यानों से भी लगने लगा है डर.

    ReplyDelete
  27. myan ko bimb bana kar kahi gahan bat....sundar rachana..

    ReplyDelete
  28. I don’t even know how I finished up here, however I thought this submit was once great. I don’t know who you’re however definitely you’re going to a famous blogger in case you are not already Cheers!

    From everything is canvas

    ReplyDelete
  29. गहन विचार लिए रचना |बधाई |
    आशा

    ReplyDelete
  30. गहन अभिव्‍यक्ति।
    सुंदर प्रस्‍तुतिकरण।

    ReplyDelete
  31. जिंदगी का सच यही है,...
    बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना ..
    नए पोस्ट पर आपका इंतजार है ///

    ReplyDelete
  32. nice poem
    gahari baat kahi aapne

    ReplyDelete
  33. एक म्यान में दो दलवारें किसी तरह रह भी जांय। मामला तो तब बिगड़ता है जब छूरे और कटारियाँ भी आ धमकती हैं:-)

    ReplyDelete
  34. अच्छी रचना के लिए आपको बधाई । आप हमेशा सृजनरत रहें और मेरे ब्लॉग पर आपकी सादर उपस्थिति बनी रहे । धन्यवाद ।

    ReplyDelete
  35. gahan chintan...myan ko pratik banakar likhi shashakt rachna..sadar badhayee aaur amantran ke sath

    ReplyDelete
  36. भावपूर्ण विचारों की सुंदर अभिव्यक्ति ।

    ReplyDelete
  37. मोल करो तलवार की..पड़ा रहने दो म्यान....कबीर की बात याद आ गई.....म्यान में एक ही तलवार समा पाती है....चाहे जैसी हो..ढोते रिश्तों की भी यही हालत होती है..म्यान खाक ही हो जाए तो बेहतर....अच्छी कविता

    ReplyDelete
  38. सुन्दर प्रस्तुति | मेर नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । निमंत्रण स्वीकार करें ।

    ReplyDelete
  39. मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    ReplyDelete
  40. bahut khub...

    www.poeticprakash.com

    ReplyDelete