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Tuesday, November 15, 2011

उसे जगाओ !

जरा देखो  तो !    ये   अचरज
कहीं ठहरा तो  नहीं है   सूरज
 
मौन  अँधियारे के  उस  छोर पर
सुन्दर  सी  सुबह  लाने  के लिए
अहर्निश,अहैतुक,अक्षय उर्जा को
अहो ! तुममें भर  जाने के  लिए
 
सपनों की   गहरी   सी   नींद में
द्वार - दरवाजे  सब  बंद  किये
और  करवट बदल - बदल  कर
सोया  है  कौन ,   उसे   जगाओ
 
कल्पनाओं  की  छद्म  नगरी  में
चुम्बकीय   मायावी  महल  को
हीरे - जवाहरातों   से  जड़ने  में
खोया है  कौन  ,  उसे  जगाओ
 
बंदी  बन    बाँगुर   में   फँसकर
बुद्धि पर चढ़ाए  मोटा  प्लस्तर
आँखों  में  स्वयं  कील  गड़ाकर
रोया  है  कौन ,    उसे   जगाओ
 
देखो असंख्य फूल खिल रहे है
अनगिनत  खग   चहक  रहे हैं
निज को  दुःख की लड़ियों  में
पिरोया है  कौन,  उसे  जगाओ
 
अब तो जागो  !  जाग भी जाओ
आसमानी मन पर सूरज उगाओ
 
परोक्ष   मार्ग  से   आती  पुकार
ये जीवन  है   अनमोल  उपहार
कण - कण का  ऋण  चुकाकर
कर लो  अपनी  जय - जयकार.

47 comments:

  1. Behtareen, Adbhut...kya khoob shabd chayan hai
    ek sampoorn kavita..bhav, alankar, pravah benamoon

    bahut pasand aayi, dhanyavad
    www.poeticprakash.com

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  2. आपका यह जागरण नाद अपना प्रभाव अवश्य छोड़ेगा।

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  3. आशा का संचार करती.......जागने का सन्देश देती ये पोस्ट बेजोड़ और लाजवाब है.......हैट्स ऑफ इसके लिए |

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  4. आँखों में स्वयं कील गड़ा कर
    रोया है कौन, उसे जगाओ
    अंतर्मन से आती विवेक की स्वर लहरियों को कविता में खूबसूरती के साथ बाँधा गया है. वाह!!

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  5. अमृता सच में आपके पास शब्दों का भंडार है। छोटे छोटे शब्दों का जिस तरह आप इस्तेमाल कर माला गूथथीं हैं, जितनी भी तारीफ हो, कम है।
    बहुत सुंदर रचना,
    शुभकामनाएं

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  6. सोये हुए को जगाया जा सकता है ... जागते हुए को कौन जगायेगा ... अच्छी प्रस्तुति ..गहन चिंतन

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  7. वाह ! आसमानी मन पर सूरज उगने ही वाला है...प्रभात होने ही वाला है..अब न सोयेंगे न ही सोने देंगे.. अब न रोयेंगे न ही रोने देंगे...बहुत सुंदर आवाहन करती कविता...आभार!

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  8. अनुपम शब्‍दों का संगम ...

    कल 16/11/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है।

    धन्यवाद!

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  9. वाह ! मन के आसमानी पटल पर सूरज का आगमन होने ही वाला है... प्रभात में अब देर नहीं...बहुत सो लिये और बहुत रो लिये अब न सोयेंगे न सोने ही देंगे और...अब न रोयेंगे न रोने ही दें गे..

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  10. aasmani mann per koi suraj ugaao ... aashawadi drishtikon

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  11. बहुत अच्छे विचारों को व्यक्त किया है आपने ।
    भावपूर्ण कृति !

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  12. जागना और सोना किसे कहते हैं , जरा ये भी बता देती | वैसे आप सच में बहुत ही अच्छा लिखती हैं | एक टीस रह जाती है |

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  13. बहुत प्रेरक और सकारात्मक सोच...बहुत भावमयी..

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  14. अब तो जागो... जाग भी जाओ....

    बहुत सुन्दर रचना.....
    सादर बधाई...

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  15. bahut sakaratmak vichar achche gahan bhaav.

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  16. गागर में सागर भर दिया है आपने । आपके पोस्ट पर आना अच्छा लगा । मेर पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

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  17. कवि तो कल्पनाओं की छद्मनगरी में ही सूरज को देखता है!

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  18. बहुत सुन्दर रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  19. अब तो जागो , जग भी जाओ

    बहुत ही प्रेरक और सार्थक विचार हैं

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  20. प्रभावशाली कविता ...सुंदर आव्हान

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  21. प्रेरक!
    हृदय क्षितिज पर उदित होता ज्ञान का सूर्य...
    सुंदर कविता!

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  22. जब जागो...तभी सवेरा...

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  23. प्रेरक और प्रभावशाली रचना.....

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  24. उम्‍मीद भरी प्रस्‍तुति।
    सुंदर....

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  25. सुबह सुबह इस रचना को पढ़ मन प्रफुल्लित हो उत्साह से भर गया . धन्यवाद .

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  26. सदा जी की हलचल,कभी न होगी निष्फल

    सोतों हों को आप निश्चित ही जगा देंगीं
    जगा कर उन्हें आप 'तन्मय' भी बना देंगीं.

    जग रे जग रे सब दुनिया जागी, जग रे जग रे जग रे
    जय हो जय हो ,अमृता जी की जय हो.
    सदा जी की जय हो.

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  27. बहुत ही प्रेरक कविता।

    सादर

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  28. अब तो जागो ! जाग भी जाओ
    आसमानी मन पर सूरज उगाओ

    भावपूर्ण , सुन्दर रचना...
    शब्द चयन और भाव दोनों अप्रतिम ....

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  29. आशा जगाती....जागने का सुन्दर सन्देश देती लाजवाब रचना ...

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  30. बहुत सुन्दर आशावादी दृष्टि की कविता -शब्द संयोजन का तो कोई जवाब ही नहीं !

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  31. लोकतंत्र के चौथे खम्बे पर अपने विचारों से अवगत कराएँ ।

    औचित्यहीन होती मीडिया और दिशाहीन होती पत्रकारिता

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  32. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 16-- 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ...संभावनाओं के बीज

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  33. राग तोड़ी गा दी आपने ....इतनी मुश्किल राग जब सहजता से गा दी ...
    कोई सोया हुआ कैसे रह सकता है ....!!हम तो क्या हमारे भाग्य भी जाग गए ....
    धन्य हुए आपकी कविता पढ़कर .....
    बहुत सुंदर ...

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  34. बंदी बन बाँगुर में फँसकर
    बुद्धि पर चढ़ाए मोटा प्लस्तर
    आँखों में स्वयं कील गड़ाकर
    रोया है कौन , उसे जगाओ....

    YE AAPKA KAAM HAI ..AUR KAUN KISKO JAGA SAKTA HAI
    PRANAAM !

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  35. सुंदर शब्दों के संयोजन से रची रचना अच्छी लगी आभार

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  36. कर लो अपनी जय-जयकार।
    ..सुदंर दर्शन पिरोया है आपने इस कविता में। ..वाह!

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  37. बहुत सुन्दर रचना...

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  38. बंदी बांगुर में .....
    बहुत सुन्दर भाव संयोजन

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  39. समय मिले तो मेरे एक नए ब्लाग "रोजनामचा" को देखें। कोशिश है कि रोज की एक बड़ी खबर जो कहीं अछूती रह जाती है, उससे आपको अवगत कराया जा सके।

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  40. आपकी कविता पढकर मुझे अच्छा लगा रचना पसंद आई..
    नए पोस्ट पर स्वागत है ,..

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  41. वह अमृता जी बहु अच्छा लिखती है आप

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  42. aashaon se bhari sundar rachna...bahut acha likha aapne..

    बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाये |
    माँ शारदे को समर्पित मेरे ब्लॉग में १००वीं पोस्ट पर जरुर पधारें |

    हे ज्ञान की देवी शारदे

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