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Friday, November 11, 2011

दुर्निवार दर्द

एक तो भीषण मानवता का वीभत्स सत्य
और विचलित करने वाला दुर्निवार दर्द
जिसका विशेषीकरण करने के क्रम में
संभ्रमित संवेदनाओं का पुट तो ठीक है
पर लगाए गये जोरदार छौंक से
जो उठता है दमघोंटू धुँआ
घुस जाता है नथुनों से फेफड़ों में
मरोड़ने लगता है पूरा कलेजा
उलझ जाती है अतड़ियाँ और भी
आने लगती है उबकाई पर उबकाई
नसों में दौड़ता विद्रोही ख़ून भी
रुकने लगता है जहाँ - तहाँ
तापक्रम के अति चरम पर
खलबलाने लगता है खूब
अपनी ही नदियाँ बहाने के लिए 
उताड़ू रहता है बात बात पर
कितना भी समझाया- बुझाया जाए
उल्टा करने लगता है शास्त्रार्थ
अपने सवालों के बवंडर में
कोमल भावनाओं को फँसा कर
तिरोहित कर देता है
इन्द्रधनुषी तृष्णा व तृप्ति को
सहज , सुन्दर आकर्षण को
जीवन के सारे तारतम्य को
जो आकाश-कुसुम सा खिला रहता है
जिलाए रखता है हमें और हम
उसी को ताकते - ताकते
कृत्रिम सुगंधों से ही सही
भरते रहते हैं प्राण - वायु
अपने अस्तित्व के तुरही में...
दर्द और संवेदना जरुरी है
खुशियों का मोल समझने के लिए
पर अति क्यूँ इति सा लगता है ..
सभी इन्द्रियों से तुरही को सुनने पर    
संवेदना का स्वर तो निकलता ही है
साथ ही खुशियों-आशाओं का
ऐसा मधुर गीत भी निकलता है कि
दुर्निवार दर्द बन जाता है
भरपूर जीने की प्रेरणा और शक्ति .

43 comments:

  1. दर्द का अच्छा वर्णन किया है आपकी कविता हृदयस्पर्शी है।
    सुन्दर प्रवाहमान रचना ! आपकी लेखनी भी निरंतर चलती रहे यही कामना है !

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  2. कुछ शब्द नहीं है इसके बारे में कहने के लिए.....मन को भा गयी आपकी लेखनी.

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  3. सत्य जब कटु होने लगता, जीवन असहजता की ओर बढ़ जाता है।

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  4. जो आकाश-कुसुम सा खिला रहता है
    जिलाए रखता है हमें और हम
    उसी को ताकते - ताकते
    कृत्रिम सुगंधों से ही सही
    भरते रहते हैं प्राण - वायु
    अपने अस्तित्व के तुरही में...

    क्षोभ के बाद भी जीने की प्रेरणा से भरी रचना अच्छी लगी

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  5. एक तीव्र मानवीय संवेदना को लेकर लिखी गई इस कविता का कैनवास बहुत बड़ा है. शब्द कहीं अधिक कह जाते हैं. वाह!! बहुत ही सुंदर.

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  6. बेहतरीन विचार।

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  7. Is adbhut oprahvaan rachna ke liye badhai swiikaren

    Neeraj

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  8. कहतें है 'दर्द' प्रकृति की ओर से दिया गया वरदान है.
    जिसके सदुपयोग से व्यक्ति बन सकता महान है.
    आपकी सुन्दर अभिव्यक्ति हमको दे रही सुन्दर ज्ञान है.
    प्रेरणा और शक्ति से ही तो जीवन में आ जाती शान है.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई,अमृता जी.

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  9. सम्वेदना के बिना जीवन कैसा
    सुन्दर रचना

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  10. Geet Kabhi Dard Mere, Dard Kabhi Meet Mere..
    Bahut hi umda rachana.. Aabhar..

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  11. khubsurat bhav .........aisa geet nikalta hai .....wah .badhai amrita ji nayi rachna ke naye bhav .........kahin jyada kah gaye .

    http/sapne-shashi.blogspot.com

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  12. meri last post par aapka khamosh comments pasand aya . thanks .nayi p[ost par swagat hai ..:) :)

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  13. अमृता जी सुन्दर अभिव्यकित ..बहुत सुन्दर ब्लॉग आप का कोलाहल से दूर ..रचनाएं मन में घर कर जाती हैं
    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण --में आप का स्वागत है -हो सके तो अपना सुझाव और समर्थन भी दें

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  14. अद्भुत रचना...
    सादर बधाई....

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  15. दर्द प्रेरणा बन जाए तो राहें सरल हो जाती हैं!
    सुन्दर भाव!

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  16. अमृता जी...क्या लिखा है आपने...बहुत खूब...लाजवाब।

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  17. वीभत्सता है जीवन में भी तो करुणा और प्यार भी कुछ कम नहीं -हाँ हम अवसर अक्सर खो देते हैं ..सुन्दर रचना

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  18. बहुत सुन्दर एवं चिंतनीय आलेख के लिये बधाई !
    शब्दों का अनूठा समिश्रण ...!

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  19. छौंक से परहेज जरूरी है।

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  20. सच है खुशियों का मोल समझने के लिए दर्द और संवेदना जरुरी है... जीने की प्रेरणा से भरी सुन्दर रचना...

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  21. hardaysprshi rachna....
    subhkaamnayrn..
    jai hind jai bharat

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  22. samvedna aur bhaavna ka atiuttam sangam.

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  23. यही तो होता है- दिल दिया द्रद लिया

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  24. दर्द और संवेदना जरूरी है खुशियों का मोल समझने के लिये..बहुत संवेदनशील और गहन दर्शन से परिपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति...

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  25. दिल..रिश्ते ...मानवीय भावनाएं ...सब दर्द की चपेट में कब और कैसे आ जाते हैं पता ही नहीं चलता ............भावपूर्ण लेखनी

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  26. आशा सुख जी जननी है।
    बहुत सुंदर कविता।

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  27. बेमिसाल......संवेदना के भाव लिए रचना

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  28. संवेदनाओं का संसार सब कुछ सामने रख देता है.

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति..आभार

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  29. दिल को छू लेने वाली रचना आभार

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  30. बहुत सुन्दर भाव लिए रचना |
    आशा

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  31. अपने अस्तित्व की तुरही में दर्द और संवेदना जरुरी है.. अमृता जी सहमत हूँ आपसे.

    सुन्दर रचना.

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  32. बहुत ही अच्छा लिखा है .

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  33. बहुत संवेदनशील और गहन रचना..

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  34. सच है अमृता जी.......दर्द कई बार बहुत कुछ देता है.......दुःख के बिना सुख का मोल पता नहीं चलता.........बहुत सुन्दर पोस्ट...........हैट्स ऑफ इसके लिए|

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  35. बहुत संवेदन शील रचना
    आपका शब्द समायोजन कमाल का है
    बहुत बहुत बधाई

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