Pages

Friday, April 22, 2011

ह्रदय-गीत

होरा हूँ मैं होरा हूँ
हर क्षण बजती होरा हूँ
मधुर स्वर से अंतर्मन में
ब्रह्मनाद सा हर एक कण में
हर क्षण बजती होरा हूँ
होरा हूँ मैं होरा हूँ.



कोरा हूँ मैं कोरा हूँ
हर क्षण बनती कोरा हूँ
हर प्रसून के प्रस्फुटन में
सृजन के हर एक स्पंदन में
हर क्षण बनती कोरा हूँ
कोरा हूँ मैं कोरा हूँ.



डोरा हूँ मैं डोरा हूँ
हर क्षण बँधती डोरा हूँ
धरा-गगन के आकर्षण में
चराचर के हर एक विचलन में
हर क्षण बँधती डोरा हूँ
डोरा हूँ मैं डोरा हूँ
हर क्षण बँधती डोरा हूँ.



होरा----घंटा
कोरा----नया
डोरा----प्रेम का बंधन  

55 comments:

  1. बहुत खूब!
    हमेशा की तरह बहुत खूब

    ReplyDelete
  2. ब्रह्मा नाद सी बजती घंटी ....
    होरा हूँ मैं होरा हूँ
    कोरी सी आभा छिटकाती ...
    कोरा हूँ मैं कोरा हूँ ...
    बंधी हस्त शुभ सुंदर मौली ....
    डोरा हूँ मैं डोरा हूँ ...
    बहुत ही सुंदर सृजन .....!!
    अद्भुत रचना .

    ReplyDelete
  3. शब्द सामर्थ्य, भाव-सम्प्रेषण, संगीतात्मकता, लयात्मकता की दृष्टि से कविता अत्युत्तम है।

    ReplyDelete
  4. सुंदर कविता ...देशज शब्दों को लेकर। बधाई अमृता जी :)

    ReplyDelete
  5. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (23.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    ReplyDelete
  6. adbhut hriday geet, jo hriday tak pahuchti hai... tannuraj

    ReplyDelete
  7. Hmmmm thank you for tellin da meaning of the words otherwise i cud nt understamnd this lovely poem.. really beautiful..keep writing :)

    ReplyDelete
  8. ह्रदय तंत्री को झंकृत करती रचना -एक चेतना जो सर्वव्याप्त होने की अनुभूति से आप्लावित और आह्लादित है !

    ReplyDelete
  9. होरा ,कोरा और डोरा ने तो मस्त कर दिया अमृताजी.
    क्या खूबसूरती से आपने कविता रच डाली कि पता ही नहीं चला
    कि मन कहाँ खो गया. बहुत बहुत शुक्रिया आपका.
    मेरे ब्लॉग पर आयें,रामजन्म पर नई पोस्ट जारी कर दी है.

    ReplyDelete
  10. होरा ..कोरा ..और डोरा के माध्यम से आपने बहुत सशक्त अर्थ संप्रेषित किये हैं ....आपका आभार

    ReplyDelete
  11. नूतन प्रेममय संगीत से गूंजती आपकी कविता संभवतः अंतर की उस गहराई से आयी है जहाँ मौन का साम्राज्य है! है न ?

    ReplyDelete
  12. वैसे एक शब्द का अर्थ पूछना था -प्रस्फुटन?

    ReplyDelete
  13. हर प्रसून के प्रस्फुटन में
    सृजन के हर एक स्पंदन में
    हर क्षण बनती कोरा हूँ
    कोरा हूँ मैं कोरा हूँ.

    बहुत सुंदर .....कितनी भाव पूर्ण रचना रची है आपने ....

    ReplyDelete
  14. बहुत खूब, बेहतरीन शब्द संचय ...शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  15. अनूठे शब्द और उतने की अनूठे भाव...वाह...प्रशंशा के लिए शब्द नहीं हैं मेरे पास...कमाल की रचना...बधाई स्वीकारें.

    नीरज

    ReplyDelete
  16. धरा-गगन के आकर्षण में

    चराचर के हर एक विचलन में

    हर छन बंधती डोरा हूँ..

    खूबसूरत ...

    बहुत खूबसूरत...!!

    ReplyDelete
  17. aaveg ka mukhar vachan srijan se jharta hua ,satat gatiman laga . aabhar ji .

    ReplyDelete
  18. बहुत सुन्दर.भाव पूर्ण हृदय गीत.
    कविता के नए आयाम.
    बहुत आभार

    ReplyDelete
  19. हृदय के स्पंदन को शब्दों मे खूबसूरती के साथ ढाल कर गीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है...यह गीत मुझे यह आभास देता है की आप ईश्वर के ज्यादा करीब हैं...होरा ...कोरा और डोरा को समझना शायद मुश्किल है एक बार के पठन से...मेरा ज्ञान अभी थोड़ा है ...

    बेहद भावपूर्ण और खूबसूरत...

    ReplyDelete
  20. बहुत सुन्दर दार्शनिक रचना...

    ReplyDelete
  21. एक बिल्कुल नये अन्दाज़ मे गहन प्रस्तुति भाव विभोर कर गयी।

    ReplyDelete
  22. होरा, कोरा, डोरा पर सटीक और सारगर्भित क्षणिकाएं.

    ReplyDelete
  23. यह बिलकुल एक बेहतरीन अध्यात्मिक कविता हो गयी है इसे ही कहते हैं कलम का कमल बधाई और शुभकामनाएं |

    ReplyDelete
  24. डोरा के सौंदर्य प्रेमी मन को मानव स्वभाव की सहजता व प्रकृति की सुंदरता ही अपने आकर्षण में बांध सकती है। सृजन के हर पल में कोरेपन का एहसास ही हमारी रचनाओं में नवीनता का पुट लेकर पुर्नजीवित होता रहता है। ऐसे हृदय गीत का हार्दिक अभिनंदन है।

    ReplyDelete
  25. अमृता जी,

    हीरा हैं आप हीरा हैं
    ब्लॉगजगत की खदान का
    सबसे नायब हीरा हैं
    हीरा हैं आप हीरा हैं

    ReplyDelete
  26. Amrita Ji,

    Neeraj Sahab ke blog par aapke commnets padhe,
    aaj pahli baar aapke geet bhi..bahut achchha
    laga..badhaee.

    Zindagee yaa Jaan kya hai? isee udhed bun men
    ek matla hua tha pesh hai...

    जिस्मे खाक़ी में क्या बला है वो
    है कोई चीज़ या हवा है वो

    maqta bhi gaur farma len..

    बेवफ़ा कह दिया 'रक़ीब' जिसे
    जान लें आप बावफ़ा है वो

    Satish Shukla 'Raqeeb'
    Juhu, Mumbai-49

    ReplyDelete
  27. कविता की भावभूमि बिल्कुल नवीन है।
    कोरा, होरा और डोरा के माध्यम से जीवन दर्शन की अद्भुत अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  28. बहुत गहन चिंतन...शब्दों और भावों का अद्भुत सामंजस्य..बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति..

    ReplyDelete
  29. शानदार रचना... सुन्दर शब्द संयोजन..आभार..

    ReplyDelete
  30. बहुत गहन चिंतन| बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति|

    ReplyDelete
  31. Bahut khoob ... naye bhaavon ka sanyojan kar ke rachi lajawaab kavita hai ...Hora, Kora aur Dora ... sundar shabdon ka sundar prayog ...

    ReplyDelete
  32. amrita ..

    much na kah paane ki stithi me hoon. shabd me praan aa gaye hai aur wo jivant hokar ek nayi abhivyakti aur ahsaas ko janm de rahe hai ..

    aapki lekhni ko salaam ..!!

    vijay

    ReplyDelete
  33. वाह ऐसी सुन्दर रचना के साथ-साथ कुछ नए शब्दों का भी ज्ञान हुआ!

    ReplyDelete
  34. बहुत सुन्दर रचना ... ये केवल यूँ ही नहीं ... दिल से कह रहा हूँ ... कई ब्लोग्स पर कई लोग बकवास रचनाएँ छापते रहते हैं ... लिखना नहीं आता है फिर भी लिखते रहते हैं ... पर आपकी इस रचना से साफ़ है कि आप बहुत सुन्दर लिखती हैं ...

    ReplyDelete
  35. शब्दों को जोड़ तोड़ वाकई बेमिशाल है। ये ह्रदय गीत ह्रदय को छूने वाला है।

    ReplyDelete
  36. साहित्य और सभ्यता से जुड़े भाव
    और नायाब शब्दावली ..
    बहुत सुन्दर कृति !!

    ReplyDelete
  37. अमृता जी ,
    बहुत ही अनूठे अंदाज़ की सुन्दर रचना ...
    शब्द चयन .....
    भाव सम्प्रेषण ........
    लय बद्धता.........
    गत्यात्मकता ...................सब कुछ से परिपूर्ण है
    सहज मिठास ...

    ReplyDelete
  38. अमृता,दुबारा आपके साइट पे आया॥ हृदयगीत अत्यंत प्रभावी है और बिंबों का प्रयोग पूर्णतया दार्शनिक,जो आपके हृदय के भावों को परिलक्षित करता है॥बहुत ही अच्छा लगा पुनः पढ़कर।
    शायद अपनी व्यस्तताओं की वजह से आप मेरे ब्लॉग sites पे नहीं आ रही इधर।समय मिले तो जरूर आईएगा ।

    ReplyDelete
  39. अर्थपरक खूबसूरत भावाभिव्यक्ति,
    आभार

    ReplyDelete
  40. अरे बापरे एते अच्छे गीत लिखती हैं...... और अभी तक आपके ब्लॉग पर हम आये ही नहीं...

    सुंदर.

    ReplyDelete
  41. कोरा होरा के साथ डोरा में बांध दिया आपने।
    ..यह कविता पहले भी पढ़ी थी, कमेंट भी किया था, किन्हीं कारणों से कमेंट प्रकाशित नहीं हुआ होगा!

    ReplyDelete
  42. यह मेरे द्वारा पढ़ी गयी इस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कविता है ,तन्मय से सिर्फ एक गुजारिश -आपकी अपनी भाषा शैली है जो कविता को सबकी कविता बनाये रखने का काम बेहद खूबसूरती से कर रही है ,हम एक पाठक के तौर पर अधिकारपूर्वक कहना चाहेंगे हम "खाई " में नहीं उतरना चाहते

    ReplyDelete
  43. काव्य का प्रवाह देखते ही बनता है. सुंदर रचना.

    ReplyDelete
  44. नए शब्द प्रयोगों से वाकिफ होने का प्रबल आकर्षण बारहा आपके ब्लॉग की तरफ खींच रहा है वैसे ही जैसे गुरुत्व गुरुतर पैमाने पर अखिल सृष्टि को नचाता है .होरा हूँ भई,होराहूँ ...

    ReplyDelete
  45. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  46. behtareen prastuti.aap ke blog par ye meri pasandida rachna hai .

    ReplyDelete
  47. बहुत प्रभावपूर्ण है आपकी रचना.

    सादर

    ReplyDelete