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Wednesday, October 13, 2010

हो सके तो

हो सके तो बन जाना
तुम मेरे लिए
गर्मी में लू का थपेड़ा
सर्द रातों में
हाड़ को चीड़ती हवा
हो सके तो बन जाना
तुम मेरे लिए
मेरे पैरों के नीचे
दहकता अंगारा
गर्दन पर
लटकती तेज़ तलवार
हो सके तो बन जाना
तुम मेरे लिए
फूटता हुआ ज्वालामुखी
अत्यधिक तीव्रता वाला भूकंप
तब भी मैं अगर
तुमसे करती रहूँ प्यार
तो समझ लेना
प्यार केवल सुखद क्षणों का
साक्षी नहीं होता
बल्कि जीवन संघर्ष में
जीतना भी सिखाता है .

6 comments:

  1. अनीता जी बहुत सुन्दर..........तप कर ही सोना बनता है.........ऐसे ही प्यार....बहुत सटीक शब्दों में प्रेम का वर्णित किया है |

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  2. माफ़ कीजियेगा अमृता जी गलती से आपका नाम गलत टाइप हो गया था|

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  3. 'आह' निकल आया इसे पढ़कर! बेहद सुन्दर!

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