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Sunday, August 29, 2010

उधार

कहो तो कुछ शब्द
मैं तुम्हें उधार दूँ
जिससे तुम प्रेम को
अभिव्यक्त कर सको
जब तुम प्रेम में होते हो
आँखों से कुछ बहता है
तुम तरंगित हो उठते
थरथराते हाथों से तुम मुझे
समेट लेना चाहते  हो
कंपकंपाती  देह  मेरे अस्तित्व  में
मिल जाना चाहती है
तुम केवल  इतना चाहते हो
कि यह पल थम सा जाये
मैं साक्षी  बन जाऊं
तुम्हारे  इस प्रेम का
कहो  तो कुछ ही शब्द
मैं तुम्हे  उधार  में दूँ
जिससे तुम  कुछ  कह सको
जो गूंजता  रहे अनवरत
मेरे ब्रम्हांड  में
ओओम् की  तरह .

10 comments:

  1. बहुत ही खुबसूरत कविता है ..........एक एक पंक्ति लाजवाब है ........पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ अच्छा लिखती हैं आप..........हिंदी भाषा पर पकड़ अछि अहि आपकी .......ये रचना सबसे अच्छी लगी ...............ऐसे ही लिखती रहिये ..........इस उम्मीद में के ऐसी ही रचनाये आगे भी पड़ने को मिलेंगी आपको फॉलो कर रहा हूँ ...........शुभकामनाये |

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  2. क्या कहूँ.. आज आपकी सारी कविताओ को पढ़ रहा हूँ.. आज इस कविता ने रोक दिया है मुझे .... I am speechless for saying anything .... आपकी लेखनी ने एक पूरे अनुभव को नयी अभिव्यक्ति दे दी है ..

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  3. मैं साक्षी बन जाऊं
    तुम्हारे इस प्रेम का
    कहो तो कुछ ही शब्द
    मैं तुम्हे उधार में दूँ

    बहुत ही बढ़िया।
    ------------
    कल 12/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. कहो तो कुछ शब्द
    मैं तुम्हें उधार दूँ
    जिससे तुम प्रेम को
    अभिव्यक्त कर सको .....
    वाह बहुत खूबसूरत

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  5. बहुत खूब ...नि:शब्‍द करती प्रस्‍तुति ।

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  6. जो गूंजता रहे अनवरत
    मेरे ब्रम्हांड में
    ओओम् की तरह .

    antarnad bajta rahe aur rom rom pulkit hota rahe..........behad khoobsoorat bhaav jinhein bahut hii sanjidagi se shabdon me piroya hai .......dil me utar gayi aapki ye abhivyakti.

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  7. कहो तो कुछ ही शब्द
    मैं तुम्हे उधार में दूँ
    जिससे तुम कुछ कह सको
    जो गूंजता रहे अनवरत
    मेरे ब्रम्हांड में
    ओओम् की तरह .

    क्या बात.... अद्भुत पंक्तियाँ...
    सुन्दर रचना...
    सादर...

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  8. वाह ...बेहतरीन रचना

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  9. गूँज रहा है ॐ की तरह ....

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  10. कुछ अभिव्यक्तियॉं शब्दों में नहीं समा सकती

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