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Monday, June 28, 2010

अनुभूति

विश्वास की लाल कालीन पर
निराशाओं के बिखेरे फूलों पर
आशाओं को आँखों में भरे हुए
चलते जाना नियति है या मज़बूरी
कि एक दिन मानवता की
खुबसूरत कल्पनाएँ सच हो जाएँगी
जिस प्यार दोस्ती की बातें
अमन चैन की बातें
शांति सुकून की बातें
हरियाली खुशहाली की बातें
समानता स्वतंत्रता की बातें
वाद -विवाद करने योग्य
मुद्दा नहीं रह जायेंगे
इन मुद्दों का हो जायेगा
उन्नमूलन इनके जड़ों से
फिर तो हमारी कल्पनाएँ
केवल एक ही रहेंगी
कि धरती की इस सुन्दरता को
और कैसे निखारा जाये
और हमारे पास केवल
एक ही भाव बचेंगे
अनुभूति केवल आनंद की
अनुभूति.... अनुभूति
और धरती सही मायने में
स्वर्ग हो जाएगी .

15 comments:

  1. और धरती सही मायने में
    स्वर्ग हो जाएगी

    उज्जवल कामना ....प्रभु आपके जीवन में ,लेखन में अपना सारा आशीष उड़ेल दें....
    बधाई ऐसे सुविचार के लिए और शुभकामनायें इनकी सफलता के लिए ...

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  2. अनुपमा जी इच्छा अनुसार ये आशीष हाज़िर है . मेरा भी आशीष . सर्वे भवन्तु सुखिनः .

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  3. और हमारे पास केवल
    एक ही भाव बचेंगे
    अनुभूति केवल आनंद की
    अनुभूति अनुभूति
    और धरती सही मायने में
    स्वर्ग हो जाएगी

    बहुत अच्छी लगीं यह पंक्तियाँ।

    सादर

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  4. और हमारे पास केवल
    एक ही भाव बचेंगे
    अनुभूति केवल आनंद की
    अनुभूति अनुभूति
    और धरती सही मायने में
    स्वर्ग हो जाएगी......प्रस्तुत पंक्तियो को पढ़ कर सच में आनंद की अनुभूति होने लगी.. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.....

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  5. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  6. सुन्दर कल्पना... सुन्दर भाव...
    सादर...

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  7. वाह! बहुत सुन्दर.
    अनुपमा जी का आभार कि
    अपनी रंगों से सजी हलचल से
    आपकी इस पोस्ट पर पहुँचाया.

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  8. बहुत सुंदर भावों से भरी आशा जगाती पंक्तियाँ!

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  9. बहुत खूबसूरत भाव हैं रचना के .

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  10. आशान्वित होने पर सपने सच भी होंगे!
    सुंदर!

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  11. अनुभूति.... अनुभूति...
    -----------------------------

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  12. धरती अभी भी स्वर्ग है
    उन लोगों के जो सोचते हैं

    वसुन्धरैव कुटुम्बकम

    सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया ।
    सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुखभाग भवेत् ।।

    वैज्ञानिक ऐसा सोचते हैं

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  13. सुन्दर शब्दों में पिरोये हुए ... सुन्दर कामना!

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